जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर शहर में फुटपाथ, सड़कों और सार्वजनिक रास्तों पर अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने का सख्त आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आस्था के नाम पर सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है और इससे आम जनता की आवाजाही प्रभावित होती है।
खंडपीठ में अभियोजन में जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा मौजूद रहे, जिन्होंने सनी मीणा द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर यह आदेश सुनाया। याचिका में प्रतापनगर सेक्टर-7 के फुटपाथ और सड़क पर मंदिर और दुकानों के अवैध निर्माण का उल्लेख था।
अदालत ने जयपुर नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे अवैध मंदिरों को हटाने और मूर्तियों को पास के वैध मंदिरों में शिफ्ट करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण अगली सुनवाई में शपथपत्र के रूप में प्रस्तुत करें। अदालत ने 7 दिनों के भीतर अवैध मंदिर हटाने और मूर्तियों का स्थानांतरण पूरा करने का आदेश भी दिया है। अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
आज्ञा में यह भी कहा गया है कि घरेलू नियमों के बावजूद सार्वजनिक मार्गों पर बने अवैध धार्मिक निर्माणों पर कार्रवाई आवश्यक है और जो अधिकारी अतिक्रमण की अनुमति देने में लापरवाह रहे हैं, उनके खिलाफ विभागीय जांच/कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
अदालत ने राजस्थान सरकार को दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश भी दिया है ताकि अवैध मंदिरों के भवनों को विधिवत ढहाने और मूर्तियों को वैध मंदिरों में स्थानांतरित करने के लिए स्पष्ट नियम बनें।
इस फैसले पर सरकार और नगर निगम स्तर पर तैयारी चल रही है, जबकि सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। अदालत की यह कार्रवाई सार्वजनिक संपत्ति को बचाने एवं कानून के अनुरूप व्यवस्था लागू कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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