अस्पतालों में मरीजों के इलाज का रिकॉर्ड ,ABHA ID का उद्देश्य स्पष्ट

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जयपुर । राज्य के मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में मरीजों के पंजीकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अस्पतालों में आने वाले रोगियों के लिए ABHA ID (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) का सृजन और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप से मजबूत करना और मरीजों के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड को एकीकृत करना बताया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ABHA ID के माध्यम से मरीज का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, जिसमें उसकी जांच रिपोर्ट, दवाइयां, इलाज का इतिहास सुरक्षित रहता है। इससे भविष्य में किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों को सटीक जानकारी मिल सकेगी और उपचार में पारदर्शिता बढ़ेगी।

हालांकि, जनहित के दृष्टिकोण से यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ABHA ID न होने की स्थिति में किसी भी मरीज को इलाज से वंचित नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार ABHA ID को बढ़ावा देना है, न कि इसे इलाज की अनिवार्य शर्त बनाना। आपातकालीन, ओपीडी या आईपीडी सेवाओं में मरीज को हर हाल में चिकित्सा सुविधा देना अस्पताल की जिम्मेदारी रहेगी।

आधार की मान्यता पर स्थिति स्पष्ट

इस आदेश के साथ आधार कार्ड की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। आधार का उपयोग केवल पहचान सत्यापन (Identity Verification) के लिए किया जा सकता है। आधार अधिनियम, 2016 के तहत किसी भी नागरिक को केवल आधार न होने के कारण सरकारी सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य सेवाओं में भी यही सिद्धांत लागू होगा। यानी मरीज चाहे तो आधार के अलावा अन्य वैध पहचान पत्र के माध्यम से भी पंजीकरण करा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में यह कदम स्वागतयोग्य है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में संवेदनशीलता और कानून की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। ABHA ID और आधार दोनों का उद्देश्य सुविधा देना है, बाधा बनाना नहीं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, सरकार का यह निर्देश स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक प्रयास है। लेकिन जनता के लिए यह जानना जरूरी है कि इलाज उनका अधिकार है, जिसे किसी भी पहचान पत्र की कमी के कारण रोका नहीं जा सकता। अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वह नियमों का पालन करते हुए मरीजों को निर्बाध और सम्मानजनक चिकित्सा सुविधा प्रदान करे।

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