जयपुर।(मीडिया)
फर्जी फर्मों के माध्यम से बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी के एक गंभीर मामले में अपर सेशन न्यायाधीश क्रम संख्या-9, जयपुर महानगर की अदालत ने फरार चल रहे आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को संगठित आर्थिक अपराध मानते हुए आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार किया।
अदालत में किशनगढ़ के ग्राम काली डूंगरी निवासी बलवीर चौधरी पुत्र नंदराम तथा किशनगढ़ के तिलोनिया निवासी भारत बामल पुत्र कणाराम बामल की ओर से अग्रिम जमानत याचिका प्रस्तुत की गई थी। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ताओं की संलिप्तता केवल पहले से गिरफ्तार आरोपियों के बयानों पर आधारित है तथा वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपियों से कोई बरामदगी शेष नहीं है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक बनवारी लाल ताखर ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि दोनों याचिकाकर्ताओं को कई बार सम्मन जारी किए गए, लेकिन वे पेश नहीं हुए। DGGI की छापेमारी के दौरान दोनों आरोपी फरार पाए गए और उन्होंने जानबूझकर तलाशी एवं जांच प्रक्रिया से बचने का प्रयास किया।
DGGI के अनुसार आरोपियों ने हंसराज गुर्जर और नरेन्द्र चौधरी की सहायता से फर्जी फर्मों का एक संगठित नेटवर्क तैयार किया। इस नेटवर्क के जरिए वास्तविक माल की आपूर्ति किए बिना फर्जी चालान और ई-वे बिल जारी किए गए। बिना माल के केवल कागजी लेन-देन दिखाकर 36 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की गई। इस मामले में हंसराज गुर्जर और नरेन्द्र चौधरी को बिना बिल माल परिवहन के आरोप में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि छापेमारी के दौरान जब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों से याचिकाकर्ताओं की भूमिका सामने आ रही है। जब्त सामग्री की फोरेंसिक जांच जारी है, जिससे आरोपियों द्वारा संचालित संगठित गिरोह के और ठोस प्रमाण मिलने की संभावना है। इसके अलावा, बोगस फर्मों के जीएसटी पंजीकरण के लिए उपयोग किए गए मोबाइल नंबर भी याचिकाकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए जाने के साक्ष्य सामने आए हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने इस मामले को गंभीर व्हाइट कॉलर क्राइम मानते हुए कहा कि ऐसे अपराध न केवल राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि आर्थिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अपर सेशन न्यायाधीश सोनम गुप्ता ने दोनों याचिकाकर्ताओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के आदेश दिए।
