राजस्थान संपर्क पोर्टल की नाकामी, निगम का डर और दबंग राजनीति के चलते जनता की उम्मीदों की लाइट बंद
अजमेर।
वैशाली नगर ,सागर विहार पाथवे की लाइटें बंद हैं ।अंधेरा केवल पाथवे और गलियों में नहीं, बल्कि ऐसा लगता है सिस्टम ही अंधेरे में चल रहा हो ,अजमेर नगर निगम के रवैए ने जनता की आवाज़ को इतना दबा दिया है कि अब लोग बोलने से पहले सोचते हैं ,कहीं उनका बोलना निगम के किसी अधिकारी को बुरा लग गया तो वो बोलने वाले को कानून के चक्कर कटवा देगा ।
22 सितंबर 2025 को अजमेर उत्तर वैशाली नगर के रहवासी ने राजस्थान संपर्क पोर्टल पर अपनी गली की बंद स्ट्रीट लाइट की शिकायत दर्ज करवाई। निगम कर्मियों ने फोन पर भरोसा दिया — “कल तक लाइट चालू हो जाएगी।” लेकिन वो “कल” आज तक नहीं आया। शिकायत को बिना लाइट चालू करे ही पोर्टल पर बंद कर दी गई ।
जब व्यक्ति ने दोबारा 181 पर कॉल करके शिकायत ओपन किए जाने को कहा तो जवाब मिला “सॉफ्टवेयर दो बार से ज़्यादा शिकायत नहीं फॉरवर्ड करता ”।
दीपावली बीत गई, लेकिन लाइट अब तक नहीं जली। शिकायतकर्ता ने डर के कारण दोबारा शिकायत नहीं की, उसने बताया कि , क्योंकि शहर में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहाँ आवाज़ उठाने वालों को झूठे केसों में फँसा दिया गया।
बाप-बेटे जो पर्यावरण की रक्षा कर रहे थे, उन पर केस दर्ज हुए और तो और, पत्रकारों तक को निशाना बनाया गया, ताकि कोई भी सच्चाई उजागर करने की हिम्मत न करे।
जनता वर्षों से दुखी है, परेशान है—लेकिन अब भ्रष्टाचार और नेताओं की दबंगई ने नया रूप ले लिया है। जो बोलता है, उसे चुप कराया जाता है। जो शिकायत करता है, उसे आरोपी बना दिया जाता है।
कभी अजमेर अपनी धार्मिकता और सजग नागरिकता के लिए जाना जाता था, आज वही जनता भय, बेबसी की जिंदगी जीने को मजबूर है । लेकिन सवाल अब सिर्फ लाइट का नहीं—लोकतंत्र की रोशनी का है। जिसे जनता को जलाना होगा।
अगर सरकार और प्रशासन ने अब भी इस अंधेरे को दूर करने की दिशा में कदम नहीं उठाया,तो जनता की सहनशीलता अब पराकाष्ठा छूने लगी है। पिछले दशकों से लोगों ने सब देखा कैसे शिकायतें बंद होती हैं, सच्चाई दबती है, और जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ कर एक दूसरों पर आरोप लगाते हैं ।
अजमेर की जनता अब चुप नहीं रहेगी
अंधेरे में छुपे भ्रष्टाचार को उजाला देने की ताकत अब जनता के हाथ में है।और आने वाले नगर निगम चुनावों में,
अजमेर का हर वोट एक सवाल होगा ।
किसने जनता को बिजली,पानी,अमृतकाल में नहीं दिया ।
अजमेर की जनता को अंधेरे में रखने का जिम्मेदार कौन
जनता अब डरना नहीं चाहती।
वह अपनी आवाज़, अपना हक और अपना शहर — वापस चाहती है।
