
रीवा में 19-20 अगस्त की भारी बारिश से मची तबाही का आकलन तेज, हजारों मकान जलभराव से प्रभावित; कलेक्टर सूर्यवंशी ने कहा—हर पीड़ित तक पहुंचे राहत, लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
रीवा। 19 और 20 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश के बाद रीवा जिले के बड़े हिस्से में आई बाढ़ ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। शहर से लेकर गांवों तक जलभराव, मकानों को नुकसान, घरेलू सामग्री की बर्बादी, फसलों और पशुधन की क्षति ने प्रभावित परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे में प्रशासन ने अब नुकसान के वास्तविक आकलन और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की कवायद तेज कर दी है। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने सभी एसडीएम को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे तीन दिन के भीतर पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि सर्वे महज औपचारिकता न बने, बल्कि हर प्रभावित परिवार की वास्तविक क्षति का संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ आकलन किया जाए। उन्होंने एसडीएम को सर्वे कार्य की लगातार निगरानी करने तथा तय समय-सीमा में रिपोर्ट तैयार कराने के निर्देश दिए हैं। प्राकृतिक आपदा में यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई है तो बिना अनावश्यक देरी के राहत राशि का प्रकरण तैयार कर मृतक के परिजनों को सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हजारों मकानों में घुसा पानी, घरेलू सामान तबाह
प्रशासन के प्रारंभिक आकलन ने बाढ़ की गंभीरता की तस्वीर सामने रख दी है। हुजूर तहसील के ग्राम टीकर में प्राकृतिक आपदा से एक व्यक्ति की मौत हुई है। तहसील क्षेत्र में 2540 मकानों में जलभराव की स्थिति बनी, जिनमें 461 मकानों में घरेलू सामग्री नष्ट होने तथा 450 मकानों में आंशिक क्षति की जानकारी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे दलों द्वारा लगातार मौके पर जाकर नुकसान का आकलन किया जा रहा है।हुजूर शहर में भी बाढ़ का असर व्यापक रहा। प्रशासन के अनुसार 8392 मकान प्रभावित हुए हैं। इनमें 7781 मकानों में घरेलू उपयोग की सामग्री को नुकसान पहुंचा, जबकि 536 मकानों को आंशिक क्षति और 75 मकानों को पूरी तरह प्रभावित बताया गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बारिश थमने के बाद भी हजारों परिवारों के सामने बाढ़ से हुए नुकसान से उबरने की चुनौती बनी हुई है।
अतिक्रमण और जलनिकासी पर भी प्रशासन की नजर
जलभराव से निपटने के लिए प्रशासन ने राहत और सर्वे के साथ-साथ जलनिकासी की व्यवस्था पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। हुजूर शहर में नगर निगम और राजस्व विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं। रतहरा नाले में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है, ताकि जलनिकासी का रास्ता सुचारु हो सके। तहसीलदार अनुपम पाण्डेय और नगर निगम की टीम ने मौके पर कार्रवाई की।वहीं गोविंदगढ़ क्षेत्र के ग्राम अमिलकी में तालाब ओवरफ्लो होने से उत्पन्न समस्या का नायब तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर समाधान कराया। ग्राम बरहुला में भी तहसीलदार राजेश शुक्ला ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी से नाली बनवाकर जलभराव की समस्या दूर कराई।
सिरमौर में मकानों के साथ पशुधन को भी भारी नुकसान
बाढ़ से सिरमौर तहसील में भी व्यापक क्षति सामने आई है। प्रशासन के अनुसार यहां 8 गाय, 12 भैंस और 59 सुअरों की मौत हुई है। बाढ़ से 6720 मकान प्रभावित हुए हैं। इनमें 1142 मकानों में घरेलू सामग्री को नुकसान हुआ, जबकि 1825 मकान आंशिक रूप से और 118 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त बताए गए हैं। सर्वे दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर वास्तविक नुकसान दर्ज कर रहे हैं।
त्योंथर में राहत और बचाव अभियान जारी
त्योंथर तहसील में एसडीएम राकेश चौरसिया की निगरानी में राहत और बचाव कार्य जारी है। ग्राम फरहदी के बाढ़ राहत शिविर में मेडिकल टीम ने 41 प्रभावित लोगों की जांच कर उन्हें नि:शुल्क दवाएं उपलब्ध कराईं। प्रशासन का दावा है कि राहत शिविरों और प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य एवं मूलभूत सुविधाओं की लगातार निगरानी की जा रही है।
साफ-सफाई से लेकर पेयजल तक, प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
बाढ़ के बाद उत्पन्न गंदगी और जलभराव से बीमारियों का खतरा न बढ़े, इसके लिए स्थानीय निकायों को तत्काल साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम आयुक्त और सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाने तथा जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को ग्राम पंचायतों के माध्यम से प्रभावित गांवों में सफाई कराने को कहा गया है।पीएचई विभाग भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में सक्रिय है। हैंडपंपों के सुधार और क्लोरीनेशन का काम किया जा रहा है। त्योंथर विकासखंड के डीह, बेदौलिहान और कोरांव में पीएचई की टीमों ने हैंडपंपों का क्लोरीनेशन किया।अब असली परीक्षा नुकसान के सही आकलन और राहत कीबाढ़ का पानी उतरने के साथ प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नुकसान के वास्तविक आकलन और पात्र पीड़ितों तक राहत पहुंचाने की है। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर सर्वे पूरा करने के साथ यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि आपदा से प्रभावित कोई परिवार राहत से वंचित न रहे।
जनसुनवाई में 292 आवेदनों के सात दिन में निराकरण के निर्देश देने के बाद अब बाढ़ सर्वे को लेकर तीन दिन की समय-सीमा तय करना प्रशासन की कार्यशैली में आई तेजी का संकेत माना जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मौके पर तैयार होने वाली सर्वे रिपोर्ट कितनी पारदर्शी होती है और सरकारी राहत वास्तव में बाढ़ से प्रभावित परिवारों तक कितनी तेजी से पहुंचती है।रीवा की बाढ़ ने नुकसान के जो आंकड़े सामने रखे हैं, वे सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड नहीं बल्कि हजारों परिवारों की तबाही की कहानी हैं। ऐसे में सर्वे की सटीकता और राहत की रफ्तार ही प्रशासन की संवेदनशीलता की असली कसौटी होगी।
