एक देश, एक चुनाव, 2029 में ही हो सकता है पहला बड़ा प्रयोग? 

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मोदी सरकार के संकेतों के बीच 22 राज्यों में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराने की चर्चा, JPC की रिपोर्ट पर होगा अगला फैसला

नई दिल्ली, 25 अगस्त। देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘एक देश, एक चुनाव’ पर पिछले कुछ दिनों में इस मुद्दे पर संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की गतिविधियां तेज हुई हैं और समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी के बयानों ने 2029 के चुनाव को लेकर नई संभावनाओं को जन्म दिया है।

सबसे बड़ा संकेत यह है कि 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव कराने की संभावना पर NDA के भीतर विचार चल रहा है। हालांकि इसे अभी केंद्र सरकार का अंतिम फैसला नहीं कहा जा सकता। मौजूदा विधायी ढांचे में व्यापक रूप से चुनावों को एक चक्र में लाने का लक्ष्य 2034 के आसपास बनता है, लेकिन 2029 में इसे आगे लाने की राजनीतिक संभावना पर चर्चा शुरू हो चुकी है।

JPC अध्यक्ष ने क्या कहा?

एक देश, एक चुनाव से जुड़े विधेयकों की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी ने कहा है कि यदि संविधान में आवश्यक संशोधन हो जाते हैं और संबंधित राज्य सरकारें सहमत होती हैं, तो 2029 में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराना संभव है।

इस बयान ने 2029 को लेकर चल रही अटकलों को और मजबूत किया है। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि पी.पी. चौधरी का बयान सरकार की अंतिम घोषणा नहीं है। इसके लिए संसद में संवैधानिक संशोधन, आवश्यक कानून और राज्यों से जुड़ी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी होगा।

22 राज्यों का क्या है गणित?

‘एक देश, एक चुनाव’ के तहत NDA के भीतर 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभा चुनाव कराने की संभावना पर चर्चा की खबर सामने आई है।

इसका मतलब यह होगा कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव का मौजूदा कार्यक्रम 2029 के लोकसभा चुनाव से अलग है, उनके चुनावी चक्र को बदलना पड़ेगा। कुछ राज्यों में विधानसभा का कार्यकाल निर्धारित समय से पहले समाप्त करने जैसी संवैधानिक प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।

यही कारण है कि यह मुद्दा केवल चुनाव कराने की तारीख का नहीं, बल्कि संविधान, राज्यों के अधिकार और संघीय ढांचे से जुड़ा मामला बन गया है।

राजस्थान पर भी पड़ेगा सीधा असर

राजस्थान सहित कई राज्यों का मौजूदा विधानसभा चुनाव चक्र 2029 के लोकसभा चुनाव से अलग है। ऐसे में यदि 2029 में एक साथ चुनाव कराने की योजना आगे बढ़ती है तो राजस्थान जैसे राज्यों की विधानसभा के कार्यकाल को लेकर भी संवैधानिक व्यवस्था करनी होगी।

यानी राजस्थान में भी यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होगा या चुनावी चक्र को 2029 के राष्ट्रीय चुनाव से जोड़ने के लिए कोई संवैधानिक व्यवस्था की जाएगी।

संसद में अभी क्या स्थिति?

केंद्र सरकार ने दिसंबर 2024 में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक संसद में पेश किया था। विपक्ष के विरोध के बाद इन्हें संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया।

JPC को देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों, विशेषज्ञों और विभिन्न वर्गों से राय लेने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति का कार्यकाल अब 2026 के शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह तक बढ़ाया जा चुका है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा समय में सरकार तत्काल अंतिम कानून लाने के बजाय समिति की रिपोर्ट और सिफारिशों का इंतजार कर रही है।

प्रधानमंत्री का संकेत किस ओर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से ‘एक देश, एक चुनाव’ को चुनाव सुधार के बड़े एजेंडे के रूप में रखते रहे हैं। लेकिन फिलहाल प्रधानमंत्री की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है कि 2029 में देशभर में लोकसभा और सभी विधानसभा चुनाव निश्चित रूप से एक साथ होंगे।

इसलिए राजनीतिक संकेतों और सरकार के अंतिम निर्णय में अंतर रखना जरूरी है। अभी तक सामने आए घटनाक्रम से इतना जरूर स्पष्ट है कि सरकार इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए संवैधानिक रास्ता तैयार करने पर गंभीरता से काम कर रही है और 2029 की संभावना अब चर्चा के केंद्र में है।

विपक्ष ने जताई कड़ी आपत्ति

दूसरी ओर कांग्रेस और विपक्षी दल इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। सोमवार को JPC की बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने ‘एक देश, एक चुनाव’ विधेयकों पर गंभीर संवैधानिक आपत्तियां उठाईं और इन्हें असंवैधानिक तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बताया।

चिदंबरम का तर्क है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ करने से राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय मुद्दों पर राष्ट्रीय मुद्दों का प्रभाव बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा प्रस्ताव को 2029 तक लागू करना व्यावहारिक और संवैधानिक रूप से संभव नहीं होगा।

JPC को मिल रहा समर्थन भी

वहीं JPC अध्यक्ष पी.पी. चौधरी का कहना है कि समिति से बातचीत के दौरान बड़ी संख्या में हितधारकों ने एक साथ चुनाव के विचार का समर्थन किया है। 24 अगस्त को पद्म पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत के बाद उन्होंने कहा कि व्यापक समर्थन है, हालांकि इसके साथ पर्याप्त सुरक्षा उपाय होना जरूरी है।

असली चुनौती—सरकार बीच में गिर गई तो?

एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था में सबसे बड़ा संवैधानिक सवाल यह है कि यदि किसी राज्य सरकार का कार्यकाल पांच साल पूरा होने से पहले समाप्त हो जाता है तो क्या होगा?

क्या उस राज्य में फिर पूरा पांच साल का चुनाव होगा या केवल शेष अवधि के लिए सरकार चुनी जाएगी? यदि विधानसभा समय से पहले भंग हो जाती है तो पूरे देश के चुनावी चक्र को कैसे बरकरार रखा जाएगा?

JPC के सामने यही सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और व्यावहारिक सवाल हैं। इन परिस्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था जरूरी होगी।

एक ही दिन चुनाव जरूरी नहीं

‘एक देश, एक चुनाव’ का मतलब यह जरूरी नहीं कि देश के हर राज्य में एक ही दिन मतदान कराया जाए। प्रस्ताव का मूल उद्देश्य लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक समान चुनावी चक्र में लाना है। मतदान कई चरणों में हो सकता है।

यानी ‘एक चुनाव’ का अर्थ मुख्य रूप से एक साथ चुनावी चक्र है, न कि पूरे देश में एक ही दिन वोटिंग।

अब आगे क्या?

फिलहाल नजर JPC की रिपोर्ट पर है। समिति की रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में आने के बाद सरकार उसके सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय कर सकती है।

यदि संविधान संशोधन और अन्य जरूरी विधायी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं तथा संबंधित राज्यों की सहमति और संवैधानिक आवश्यकताएं पूरी होती हैं, तो 2029 में बड़े पैमाने पर लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की संभावना मजबूत हो सकती है।

लेकिन अभी 2029 को अंतिम तारीख घोषित करना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि ‘एक देश, एक चुनाव’ अब केवल राजनीतिक नारा नहीं रहा, बल्कि संसद की समिति, संवैधानिक संशोधन और राज्यों की भूमिका से जुड़ी वास्तविक विधायी प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। 2029 इस पूरी कवायद का अगला बड़ा पड़ाव बन सकता है।

स्त्रोत: Indian Express, The New Indian Express, Times of India, Economic Times, NDTV तथा JPC से संबंधित ताजा रिपोर्टें।

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