जयपुर। देश में हाल ही में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राजस्थान सरकार ने न्याय प्रणाली को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि प्रदेश में सात वर्ष से अधिक सजा वाले गंभीर मामलों की जांच अब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के माध्यम से कराई जाएगी। इसके लिए राज्य के थानों को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नए कानूनों की मंशा के अनुरूप आपराधिक न्याय प्रणाली को पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाया जा रहा है। इसी क्रम में एफआईआर, ई-एफआईआर और चार्जशीट के ई-रिकॉर्ड अपडेट से लेकर अदालत द्वारा दिए जाने वाले अंतिम निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जा रहा है। इससे न केवल जांच और सुनवाई में होने वाली देरी कम होगी, बल्कि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।
राज्य सरकार का मानना है कि एफएसएल आधारित जांच से साक्ष्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा और दोषियों को सजा दिलाने में मजबूती आएगी। वहीं, डिजिटल रिकॉर्डिंग से मामलों की निगरानी आसान होगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने ये विचार राजस्थान पुलिस अकादमी में ‘विकसित भारत में पुलिस व्यवस्था’ विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानून न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार हैं और राजस्थान सरकार इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस पहल को प्रदेश में न्यायिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे कानून व्यवस्था और आमजन के भरोसे को और मजबूती मिलेगी।
