जयपुर। राजस्थान में कर चोरी और फर्जी जीएसटी पंजीकरण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत वाणिज्यिक कर विभाग ने जयपुर में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। विभाग की कार्रवाई में मैसर्स सनसन ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड नामक फर्म अपने घोषित व्यावसायिक पते पर अस्तित्वहीन पाई गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फर्म ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर GST पंजीकरण प्राप्त किया था। विभाग को आशंका है कि फर्जी बिलों के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये के कर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। जांच के दौरान फर्म के क्रेडिट लेजर में 22.78 लाख रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) उपलब्ध मिला है, जिसे संदिग्ध माना गया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि फर्जी बिलों के माध्यम से बड़े पैमाने पर लेन-देन किया गया हो सकता है। हालांकि कर अपवंचन की वास्तविक राशि का खुलासा विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
कार्रवाई के दौरान टीम ने फर्म के व्यावसायिक पते के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति के आवासीय पते का भी सत्यापन किया, लेकिन वहां भी कोई वास्तविक संचालन नहीं मिला। इससे फर्म के पूरी तरह फर्जी होने का संदेह और मजबूत हो गया है।
वाणिज्यिक कर विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की गहन जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई विभाग की एनफोर्समेंट विंग-1, सर्किल-सी की टीम द्वारा की गई।
