पुष्कर मेला 2025,भक्ति और संस्कृति का संगम

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अजमेर, 2 नवंबर।
असरोवर में पुण्य स्नान से दिन की शुरुआत, ऊँटों के नृत्य और लोकनृत्य प्रस्तुतियों ने मोहा मन

अजमेर। ब्रह्मा नगरी पुष्कर आज पूर्ण आस्था, संस्कृति और लोकरंग के अद्भुत संगम का साक्षी बनी। प्रातःकाल से ही पुष्कर सरोवर के घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान ब्रह्मा की नगरी में स्नान को पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है, इसलिए श्रद्धालुओं ने उदयाचल सूर्य की प्रथम किरणों के साथ सरोवर में डुबकी लगाई। मंत्रोच्चारण, दीपदान और आरती की गूँज ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

स्नान के उपरांत भक्तों और पर्यटकों का रुख मेला मैदान की ओर रहा, जहाँ लोककला और परंपरा का उत्सव प्रारंभ हुआ। मैदान में ऊँटों की आकर्षक परेड और उनका संगीत की थाप पर थिरकना दर्शकों के लिए अद्भुत दृश्य रहा। पशुपालकों ने सजे-धजे ऊँटों, घोड़ों और अन्य पशुओं का प्रदर्शन किया। विदेशी पर्यटक भी इस जीवंत संस्कृति में भागीदार बने और कैमरों में यादगार पल कैद किए।

दोपहर के सत्र में कालबेलिया और घूमर जैसी लोकनृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने राजस्थानी लोकगीतों पर जब प्रस्तुति दी, तो पूरा मेला मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मंच से उठती ढोल, चकरी और मांदल की धुनों ने हर हृदय को आनंद और गर्व से भर दिया।

संध्या समय सरोवर के घाटों पर दीपों की पंक्तियाँ जगमगाईं और आरती की मधुर ध्वनि ने पुष्कर को स्वर्ग सा प्रकाशमान कर दिया। भक्तों ने आरती में सम्मिलित होकर अपने मनोभावों को ईश्वर को समर्पित किया। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए सघन व्यवस्था की।

आज का पुष्कर मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव रहा — जहाँ स्नान से आत्मा को शुद्धि मिली और लोककला ने हृदय को आनंद से भर दिया। ब्रह्मा नगरी पुष्कर सचमुच आज “भक्ति और संस्कृति की धरती” बन गई।

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