कैथा हनुमान स्वामी मंदिर प्रांगण में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, 7 सितंबर को हवन और विशाल भंडारे के साथ होगा महायज्ञ का विसर्जन
रीवा। यज्ञों और धार्मिक अनुष्ठानों की पावन स्थली के रूप में पहचान रखने वाले कैथा हनुमान स्वामी मंदिर प्रांगण में इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण की अनूठी छटा दिखाई दे रही है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तथा श्रावण-भादों के पवित्र अवसर पर आयोजित होने वाले श्रीमद्भागवत भक्ति ज्ञान महायज्ञ का शुभारंभ 31 अगस्त 2026 को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ।कलश यात्रा के साथ शुरू हुए इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के श्रद्धालुओं की विशेष भागीदारी देखने को मिली। भक्ति और आस्था के वातावरण के बीच मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को धार्मिक रंग में रंग दिया।
भागवत कथा की बैठकी में उमड़े श्रद्धालु
महायज्ञ के क्रम में 1 सितंबर 2026 को श्रीमद्भागवत कथा की बैठकी का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान मंदिर प्रांगण में बड़ी संख्या में भक्त और श्रद्धालु पहुंचे और धार्मिक आयोजन में सहभागिता की।आयोजक मंडल के अनुसार, कैथा में यह आयोजन परंपरागत रूप से सार्वजनिक सहयोग से किया जाता है। क्षेत्र के लोगों की सहभागिता से आयोजित होने वाला यह धार्मिक अनुष्ठान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीव कल्याण और विश्व शांति की कामना से जुड़ा हुआ है।
आचार्य गौरी शंकर शुक्ला के मुखारविंद से होगा कथा और प्रवचन
आयोजक मंडल की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया कि यह एक सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम है, जिसमें समस्त क्षेत्रवासियों का सहयोग और सहभागिता रहती है।उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का पारायण एवं धार्मिक प्रवचन प्रसिद्ध ज्योतिष एवं कर्मकांड विद्वान डॉ. आचार्य गौरी शंकर शुक्ला के मुखारविंद से किया जा रहा है।कथा और प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और मानव कल्याण का संदेश दिया जा रहा है।
7 सितंबर को हवन और विशाल भंडारे के साथ होगा विसर्जन
श्रीमद्भागवत भक्ति ज्ञान महायज्ञ का समापन एवं विसर्जन कार्यक्रम 7 सितंबर 2026, सोमवार आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर विधिवत हवन-पूजन के साथ विशाल भंडारे का आयोजन होगा।आयोजक मंडल ने क्षेत्र सहित आसपास के सभी गांवों और नगरवासियों से कार्यक्रम में पहुंचकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।
भक्ति, आस्था और जनसहयोग का बना केंद्र कैथा
कैथा हनुमान स्वामी मंदिर प्रांगण में आयोजित यह महायज्ञ एक बार फिर क्षेत्र की धार्मिक परंपरा और सामूहिक आस्था का प्रतीक बनकर सामने आया है। कलश यात्रा से शुरू हुए इस आयोजन में श्रद्धालुओं की लगातार भागीदारी बनी हुई है। यज्ञस्थल पर गूंजते मंत्रोच्चार, श्रीमद्भागवत कथा का रसपान और श्रद्धालुओं की आस्था—कैथा इन दिनों पूरी तरह भक्ति के रंग में रंगा हुआ है। आयोजक मंडल ने समस्त भक्तों और श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे आगामी दिनों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करें तथा 7 सितंबर को हवन एवं विशाल भंडारे में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचें।
