भारत-न्यूज़ीलैंड FTA लागू: निर्यात शुल्क शून्य ,20 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य

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पीयूष गोयल और टॉड मैक्ले ने समझौते को बताया व्यापारिक साझेदारी का नया अध्याय; डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026।(एजेंसी) भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आज से लागू हो गया है। इससे भारतीय निर्यातकों को न्यूज़ीलैंड के बाजार में सभी टैरिफ लाइनों पर शून्य सीमा शुल्क का लाभ मिलेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार, निवेश, रोजगार और कारोबारी अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने 19 अक्टूबर को ऑनलाइन बैठक के माध्यम से समझौते के लागू होने की तारीख की संयुक्त घोषणा की थी। दोनों देशों ने 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

 भारतीय निर्यातकों को मिलेगा लाभ

समझौते के तहत कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों सहित भारतीय उत्पादों को न्यूज़ीलैंड में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), कारीगरों और महिला उद्यमियों के लिए नए बाजार खुलने की संभावना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर इसे भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी और साझा समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था। न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री **क्रिस्टोफर लक्सन** ने भी समझौते को रोजगार, आय और व्यापार बढ़ाने वाला कदम बताया। 

20 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता

समझौते के अंतर्गत न्यूज़ीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय वस्तु एवं सेवा व्यापार को 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है।

किसानों के हितों की सुरक्षा

भारत ने दूध, पनीर, अन्य प्रमुख डेयरी उत्पादों, चीनी और खाद्य तेलों सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा है। सेब, कीवी और मनुका शहद जैसे कुछ उत्पादों के लिए कोटा और अन्य शर्तें लागू होंगी।

समझौते में भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 अस्थायी रोजगार वीजा और युवाओं के लिए प्रतिवर्ष 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा का प्रावधान भी है।

समझौते से भारतीय निर्यात, रोजगार और निवेश में कितनी वृद्धि होती है तथा घरेलू किसानों और उद्योगों के हित कितनी प्रभावी तरह सुरक्षित रहते हैं। यह आने वाले समय में ही पता चलेगा ।

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