भोपाल/रीवा। रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र के ग्राम रोझौही–सरई कला में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का मामला अब प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। रीवा, सतना एवं पन्ना के दौरे के बाद भोपाल स्थित आवास पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रोझौही परियोजना को लेकर भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने ग्रामसभा की सहमति, बोरिंग की अनुमति और कथित अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) के आधार पर सवाल खड़े करते हुए सरकार से जवाब मांगा।
🔴 रोझौही का मुद्दा सबसे आगे, सरकार से मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि जब ग्रामसभा ने प्रस्तावित परियोजना से जुड़ी ड्रिलिंग के लिए सहमति नहीं देने की बात कही थी, तो फिर अनुमति किस आधार पर जारी की गई? उन्होंने संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने और कथित NOC की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई।कांग्रेस का आरोप है कि स्थानीय ग्रामीणों की आपत्तियों के बावजूद परियोजना से जुड़ी प्रारंभिक गतिविधियां आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। इस पूरे मामले में ग्रामसभा के प्रस्ताव, पंचायत के पत्र और अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, कथित फर्जीवाड़े के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
ग्रामीणों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर सवाल
रोझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परमाणु बिजली परियोजना को लेकर ग्रामीण लगातार विरोध जता रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख चिंताओं में जमीन, जलस्रोत, खेती-किसानी, संभावित पर्यावरणीय प्रभाव, जनस्वास्थ्य और भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा शामिल हैं।सिंघार ने घनी आबादी वाले क्षेत्र में परमाणु परियोजना की उपयुक्तता पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास के नाम पर स्थानीय लोगों की सुरक्षा और अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने परियोजना से संबंधित सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय आकलन पर भी स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
विमला कोल की मौत के बाद आंदोलन का मुद्दा और गंभीर
रोझौही में चल रहे जल सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मौत का मामला भी चर्चा में आया। सिंघार ने घटना पर दुख जताते हुए प्रशासनिक अधिकारियों से मौत की रिपोर्ट और कार्रवाई को लेकर सवाल किए। उन्होंने पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की थी।कांग्रेस ने आंदोलनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
अब सरकार के जवाब पर टिकी निगाहें
रोझौही परियोजना को लेकर अब कई अहम सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। ग्रामसभा की आपत्तियों और कथित NOC विवाद की जांच कब होगी? परियोजना की पर्यावरणीय एवं सुरक्षा संबंधी जांच की स्थिति क्या है? ग्रामीणों की आशंकाओं का समाधान कैसे किया जाएगा?प्रशासन का कहना रहा है कि फिलहाल स्थल की उपयुक्तता जांचने के लिए प्रारंभिक परीक्षण किए जा रहे हैं और परियोजना के लिए जमीन आवंटित नहीं की गई है। ऐसे में अब सरकार की ओर से दस्तावेजों, अनुमतियों और ग्रामीणों की आपत्तियों पर स्पष्ट जवाब का इंतजार है। रोझौही का सवाल अब सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है। यह ग्रामसभा की भूमिका, जनसुरक्षा, पर्यावरणीय जवाबदेही और विकास की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की सहमति से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
