रोझौही के बाद अंतरैला के ग्रामीणों ने भी न्यूक्लियर प्लांट के विरुद्ध कसी कमर// अब नजदीकी ग्राम अंतरैला में भी प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा// अतरैला गांव में हुआ जोरदार विरोध प्रदर्शन

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दिनांक 19 अक्टूबर 2026 रीवा मप्र। रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी अब आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्राम पंचायत पताई के अंतर्गत आने वाले ग्राम अतरैला में युवाओं और नागरिकों ने एकजुट होकर इस परियोजना के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने “विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए” एवं “परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ” के जोरदार नारे लगाए। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे ऐसा विकास नहीं चाहते जिसमें विनाश छिपा हो और जिससे उनकी आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराए।

रेडिएशन और बीमारियों का है बड़ा खतरा

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के ग्रामीण क्षेत्र में दौरे और जनसंपर्क के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी चिंताएं साझा कीं। स्थानीय लोगों का तर्क है कि न्यूक्लियर पावर प्लांट से यूरेनियम और प्लूटोनियम जैसे रेडियोएक्टिव पदार्थों से निकलने वाला विकिरण (रेडिएशन) अत्यंत खतरनाक होता है। इससे क्षेत्र में कैंसर, जन्मजात विकलांगता और अन्य असाध्य बीमारियां फैलने का गंभीर खतरा है, जिससे सैकड़ों गांवों की जीवन और आजीविका प्रभावित होगी।

ग्रामीणों ने खुलकर रखी अपनी बात

अतरैला के महेश कोल बताया कि न्यूक्लियर पावर प्लांट उनके और आसपास के सैकड़ों गांवों के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा, जिससे कैंसर जैसी भयानक बीमारियां फैलेंगी। वहीं रमेश साकेत ने बताया कि इस परियोजना को एक विभीषिका करार देते हुए कहा कि यह लोगों की जिंदगी समाप्त कर देगी और सरकार से इसे न लगाने की पुरजोर अपील की। अंतरैला निवासी रावेंद्र पाल ने चेतावनी दी कि यह पावर प्लांट स्थानीय निवासियों के लिए पूरी तरह से असुरक्षित और विनाशकारी है। राजमणि प्रजापति और अभिमान कोल ने कहा कि वे एक प्रतिशत भी यह प्लांट नहीं चाहते, वहीं अभिमान कोल ने रोझौही में कई आदिवासियों के पट्टे निरस्त किए जाने और जोर-जबरदस्ती का आरोप लगाते हुए आक्रोश व्यक्त किया। शिवकुमार यादव व तुलसी राम साकेत ने स्पष्ट किया कि पताई और अतरैला के लोग किसी भी कीमत पर इस प्लांट को अपने क्षेत्र के नजदीक नहीं लगने देंगे, क्योंकि इससे आने वाली पीढ़ियों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां फैलेंगी। उन्होंने कहा कि सरई और रोझौही के लोगों को तो विस्थापित कर दिया जाएगा लेकिन उनका क्या होगा जो प्लांट से 3 किमी दूर हैं। आखिर रेडिएशन और असाध्य बीमारियों का खामियाजा तो उन्हें ही भुगतना पड़ेगा। बृजेंद्र मिश्रा ने मुखर होकर चर्चा करते हुए कहा कि न्यूक्लियर पावर प्लांट का रेडिएशन केवल मौजूदा पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए घातक है।ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस खतरनाक परियोजना को तुरंत रद्द किया जाए, अन्यथा सभी आसपास के ग्राम क्षेत्र के लोग इसके विरोध में और भी अधिक कड़ा रुख अपनाने को मजबूर होंगे। *स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

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