मऊगंज की मान्या मिश्रा अब रियो में लहराएंगी तिरंगा

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रायपुर के राष्ट्रीय चयन ट्रायल में स्वर्णिम प्रदर्शन, अंडर-63 किग्रा वर्ग में भारतीय टीम के लिए चुनी गईं

मऊगंज/हनुमना। विन्ध्य की धरती की बेटी मान्या मिश्रा ने ताइक्वांडो में अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की राह बना ली है। रायपुर में 14 और 15 सितंबर को आयोजित स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) के राष्ट्रीय चयन ट्रायल में मान्या ने अंडर-63 किलोग्राम भारवर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन ISF जिम्नेसियाड वर्ल्ड स्कूल गेम्स-2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में 3 से 8 दिसंबर तक प्रस्तावित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में मान्या अंडर-63 किलोग्राम वर्ग में भारत की ओर से चुनौती पेश करेंगी। दुनिया के अलग-अलग देशों के स्कूली खिलाड़ी इस आयोजन में हिस्सा लेंगे और इसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्या को अपनी खेल क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा।

संघर्ष, साधना और प्रशिक्षण ने गढ़ी सफलता

मान्या की इस उपलब्धि के पीछे निरंतर अभ्यास और प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन अहम रहा है। राष्ट्रीय चयन ट्रायल में दबाव के बीच संयम, तकनीक और आक्रामक खेल का बेहतर तालमेल उनके प्रदर्शन की खासियत रहा, जिसने उन्हें भारतीय दल तक पहुंचाया। मान्या का संबंध मऊगंज जिले की हनुमना तहसील के ग्राम पांती से बताया गया है। उनके पिता विद्याशंकर मिश्रा जबलपुर उच्च न्यायालय में अधिवक्ता हैं। परिवार और क्षेत्र के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है कि स्थानीय स्तर से निकली प्रतिभा अब देश की जर्सी में अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर उतरने जा रही है।मान्या की सफलता में उनके प्रशिक्षकों जगजीत सर और श्रीजय मैम के मार्गदर्शन के साथ शुरुआती प्रशिक्षण देने वाले अरुण यादव और नमिता मैम के योगदान को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे अभ्यास और लगातार मिले मार्गदर्शन का परिणाम अब रियो की धरती पर दिखाई देगा।

विन्ध्य से रियो तक पहुंची खेल प्रतिभा

मान्या के भारतीय टीम में चयन की खबर के बाद मऊगंज, हनुमना और विन्ध्य क्षेत्र में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों और शुभचिंतकों ने युवा खिलाड़ी को बधाई देते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दी हैं।मान्या के सामने अब अगली चुनौती रियो डी जेनेरियो में होगी, जहां वह भारत के तिरंगे के साथ ताइक्वांडो के अंडर-63 किलोग्राम वर्ग में मैदान में उतरेंगी। मध्य प्रदेश की इस युवा खिलाड़ी की कहानी उन प्रतिभाओं के लिए भी उम्मीद जगाती है, जो छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर बड़े खेल मंच तक पहुंचने का सपना देखती हैं।

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