रीवा। सिरमौर जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत हिनौता में सरपंच पद के उपचुनाव के बीच प्रस्तावक से जुड़ा विवाद अब पुलिस जांच के दायरे में पहुंच गया है। सांसद जनार्दन मिश्रा के बेटे के चुनावी प्रस्तावक बताए जा रहे हनुमान प्रसाद शुक्ल की ओर से शपथ पत्र देकर अपहरण किए जाने का आरोप लगाए जाने के बाद क्षेत्र के चुनावी माहौल में हलचल बढ़ गई है।शिकायत और शपथ पत्र सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अपहरण संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और सामने आने वाले साक्ष्यों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुराने कथन और नए हलफनामे के बीच फंसा मामला
पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हनुमान प्रसाद शुक्ल के कथित तौर पर अलग-अलग सामने आए बयानों को माना जा रहा है। पहले उनके स्वेच्छा से संबंधित लोगों के साथ रहने की बात सामने आने का दावा किया गया था, जबकि अब शपथ पत्र में उन्होंने अपने अपहरण का आरोप लगाया है।बयानों में सामने आ रहे इस अंतर ने स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के सामने अब यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि शुक्ल को आखिरी बार किन लोगों के साथ देखा गया था, वे किन परिस्थितियों में उनके साथ गए और बाद में ऐसा क्या हुआ कि अपहरण का आरोप लगाते हुए नया शपथ पत्र सामने आया।जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि शपथ पत्र कब, कहां और किसके समक्ष दिया गया तथा पहले के कथन और वर्तमान आरोप के बीच अंतर की वजह क्या है।
चुनावी पृष्ठभूमि ने बढ़ाई संवेदनशीलता
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि यह घटनाक्रम हिनौता ग्राम पंचायत के सरपंच पद के उपचुनाव के ठीक बीच सामने आया है। रीवा जिले में पंचायत उपचुनाव के तहत एक जनपद सदस्य, चार सरपंच और 38 पंच पदों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया चल रही है। हिनौता में सरपंच पद के लिए चुनाव होना है। 1निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 15 सितंबर को नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई, 16 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच हुई और 18 सितंबर को नाम वापसी तथा अंतिम प्रत्याशी सूची की प्रक्रिया निर्धारित थी। मतदान 29 सितंबर को होना है। में प्रस्तावक से जुड़ा यह विवाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, मामले को सीधे चुनावी दबाव या किसी राजनीतिक साजिश से जोड़ना फिलहाल जांच पूरी होने से पहले जल्दबाजी होगी।
अब जांच में सामने आएगा घटनाक्रम का सच
पुलिस के लिए शपथ पत्र के साथ-साथ पूर्व में दिए गए कथनों, संबंधित व्यक्तियों के बयान, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल जैसे तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच का एक अहम पहलू यह भी रहेगा कि नया शपथ पत्र किन परिस्थितियों में दिया गया और क्या शिकायतकर्ता पर किसी प्रकार का दबाव था।फिलहाल पूरा विवाद आरोप, शिकायत और शपथ पत्र के स्तर पर है। जब तक पुलिस जांच में तथ्यों की पुष्टि नहीं होती, तब तक किसी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।लेकिन इतना जरूर है कि हिनौता के उपचुनाव से ठीक पहले प्रस्तावक के अपहरण के आरोप ने स्थानीय चुनावी माहौल को असामान्य रूप से संवेदनशील बना दिया है। अब निगाह पुलिस जांच पर है कि पुराने और नए बयानों के बीच की कड़ी आखिर कहां जुड़ती है और इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर क्या सामने आती है।
