तीसरी किस्त मिलने के बाद भी घर अधूरे छोड़ने वालों की खैर नहीं, तहसीलदार न्यायालय में पहुंचेंगे वसूली प्रकरण; पंचायत अमले पर भी कार्रवाई की तलवार
रीवा। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के क्रियान्वयन में अपेक्षित गति नहीं आने पर जिला पंचायत प्रशासन ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जिला पंचायत सभागार में हुई योजना की समीक्षा के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी सृष्टि देशमुख गौड़ा ने अधिकारियों और मैदानी अमले को दो टूक संदेश दिया कि सरकारी योजना में लापरवाही और उदासीनता को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।समीक्षा के दौरान सबसे गंभीर मामला उन आवासों का सामने आया, जिनके निर्माण के लिए हितग्राहियों को सरकारी सहायता की राशि मिल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। सीईओ ने ऐसे मामलों में केवल समझाइश तक सीमित रहने के बजाय वसूली की कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। संबंधित प्रकरण तैयार कर उन्हें तहसीलदार न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
हनुमना के ब्लॉक समन्वयक को नोटिस
योजना की प्रगति में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर हनुमना जनपद के ब्लॉक समन्वयक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को स्पष्ट किया गया कि योजना की निगरानी केवल कागजी रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मौके पर निर्माण की वास्तविक स्थिति की लगातार पड़ताल की जाए।
बैजनाथ और अमिरती पंचायतों पर भी निगरानी कड़ी
रीवा जनपद की बैजनाथ और अमिरती ग्राम पंचायतों में भी कार्य की स्थिति को लेकर नाराजगी सामने आई। यहां पदस्थ सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों को लापरवाही के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का फोकस अब उन आवासों पर है, जिनमें राशि जारी होने के बावजूद निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी है।
तीसरी किस्त लेने वालों को सात दिन की मोहलत
समीक्षा बैठक में वर्ष 2016-17 से 2021-22 के दौरान तीसरी किस्त प्राप्त कर चुके, लेकिन अभी तक निर्माण पूरा नहीं करने वाले हितग्राहियों के आवासों को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। ऐसे सभी अपूर्ण आवासों को सात दिनों के भीतर पूर्ण कराने की समयसीमा तय की गई है।
स्कूलों के किचन शेड भी बनेंगे प्राथमिकता
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में मरम्मत की आवश्यकता वाले किचन शेड का मुद्दा भी उठाया गया। सीईओ ने संबंधित अमले को निर्देशित किया कि ऐसे कार्यों को भी एक सप्ताह के भीतर पूरा कराया जाए, जिससे स्कूलों में आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा सके।जिला पंचायत प्रशासन के इस सख्त रुख के बाद अब प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे निर्माणों और पंचायत स्तर पर योजना की निगरानी को लेकर जवाबदेही तय होती दिखाई दे रही है। सात दिन की समयसीमा के बाद जमीनी स्तर पर कितने आवास पूरे होते हैं और लापरवाही करने वालों पर क्या अगली कार्रवाई होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
