कोटा में श्री भारतेन्दु समिति का शताब्दी समारोह: साहित्य और संगीत की विरासत का भव्य सम्मान

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कोटा। राजस्थान की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली श्री भारतेन्दु समिति के 100 वर्ष पूरे होने पर बुधवार, 9 सितंबर 2026 को कोटा में भव्य शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। समारोह का आयोजन हर वर्ष की परंपरा के अनुसार महान साहित्यकार श्री भारतेन्दु हरिश्चंद्र जी की जयंती के अवसर पर किया गया। इस वर्ष भारतेन्दु हरिश्चंद्र जी की 176वीं जयंती भी समारोह के साथ मनाई गई।

उल्लेखनीय है कि श्री भारतेन्दु समिति की स्थापना वर्ष 1926 में कोटा में स्वर्गीय श्री हनुमान प्रसाद सक्सेना ‘दिनेश’ द्वारा की गई थी। एक शताब्दी की इस गौरवपूर्ण यात्रा में समिति ने साहित्य, संस्कृति और कला के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान कायम रखी है।

शताब्दी समारोह में लोकसभा अध्यक्ष माननीय श्री ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित रहे। समारोह के दौरान उनके कर-कमलों से संगीत पुस्तक ‘सांगीतिक काव्य के अद्वितीय रचनाकार – पं. रामाश्रय झा ‘रामरंग’’ का विमोचन किया गया। इसी अवसर पर उनके बड़े भाई डॉ. विपुल सक्सेना की पुस्तक ‘त्रिकाल रस’ का भी विमोचन हुआ।

समारोह में साहित्य और संगीत की इस गौरवपूर्ण परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाली युवा गायिका आस्था सक्सेना को उनके संगीत योगदान के लिए ‘स्वर सुधाश्री सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इस सम्मान ने समारोह को पारिवारिक और सांस्कृतिक विरासत के एक भावपूर्ण क्षण में बदल दिया।

1978 में भी रचा गया था स्वर्णिम इतिहास

श्री भारतेन्दु समिति की गौरवशाली यात्रा में वर्ष 1978 भी विशेष महत्व रखता है। समिति की स्वर्ण जयंती के अवसर पर उस समय समिति के साहित्य मंत्री रहे प्रसिद्ध साहित्यकार एवं स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री रमेश ‘अनिल’ तथा उनकी कार्यकारिणी द्वारा भव्य आयोजन किया गया था।

इस प्रकार वर्ष 1978 की स्वर्ण जयंती से लेकर वर्ष 2026 के शताब्दी समारोह तक यह परंपरा साहित्य, संगीत, संस्कृति और सामाजिक चेतना की निरंतर यात्रा का प्रतीक बनकर सामने आई है।

एक शताब्दी पहले बोया गया साहित्य और संस्कृति का यह बीज आज भी नई पीढ़ी के रचनाकारों और कलाकारों को प्रेरित कर रहा है। कोटा में आयोजित शताब्दी समारोह इसी जीवंत परंपरा और विरासत का साक्षी बना।

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