‘मेरी बहू सुंदर थी…’ के एक वाक्य से उठे सवालों ने बढ़ाया पोस्टमार्टम विवाद, विधायक अभय मिश्रा ने मोबाइल पर दिखाया डॉक्टर का संदेश

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रीवा के संजय गांधी अस्पताल को लेकर विधायक के गंभीर आरोपों से सियासत गरमाई; बोले—दो साल पहले मिली थी पहली जानकारी, अब निष्पक्ष जांच की मांग पर भोपाल तक पहुंचा मामला

रीवा/भोपाल। रीवा के संजय गांधी अस्पताल को लेकर चल रहा विवाद अब सिर्फ अस्पताल की व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रह गया है। महिलाओं के पोस्टमार्टम के दौरान कथित आपत्तिजनक व्यवहार के विधायक अभय मिश्रा के आरोपों ने पूरे मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। बुधवार को भोपाल में एक मीडिया बातचीत के दौरान सेमरिया विधायक ने दावा किया कि उन्हें इस तरह की शिकायत अचानक नहीं मिली, बल्कि करीब दो वर्ष पहले एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क कर अपनी बहू के पोस्टमार्टम से जुड़ी गंभीर आशंका बताई थी।विधायक के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति ने उनसे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में मदद करने के लिए संपर्क किया था। बातचीत के दौरान उस व्यक्ति ने कथित तौर पर कहा कि उसकी बहू सुंदर थी और संजय गांधी अस्पताल में सुंदर महिलाओं के पोस्टमार्टम के दौरान उनके साथ गलत व्यवहार किए जाने की चर्चा है। यही कथित बातचीत विधायक के उस दावे का आधार बनी, जिसे लेकर अब रीवा से लेकर भोपाल तक सियासी हलचल तेज हो गई है।

मोबाइल पर दिखाया कथित डॉक्टर का संदेश

मामले को और गंभीर बताते हुए अभय मिश्रा ने बातचीत के दौरान अपने मोबाइल फोन पर अस्पताल से जुड़े एक डॉक्टर का कथित संदेश भी दिखाया। विधायक ने डॉक्टर की पहचान सार्वजनिक नहीं करने की बात कही। उनके अनुसार संदेश में पोस्टमार्टम से जुड़े कर्मचारियों पर पहले भी आरोप लगने, कार्रवाई होने और कुछ कर्मचारियों को हटाए जाने का उल्लेख किया गया है।विधायक द्वारा बताए गए संदेश में अलग-अलग समय पर अस्पताल से जुड़े सफाई कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतों और कार्रवाई का जिक्र होने का दावा किया गया। संदेश में महिला शवों के साथ कथित अनुचित व्यवहार की शिकायत की जांच कराने की बात भी कही गई है। हालांकि, इस संदेश की स्वतंत्र पुष्टि, उसकी वास्तविकता और उसमें लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच का निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर फिर खड़े किए सवाल

संजय गांधी अस्पताल पहले से ही कई विवादों के कारण चर्चा में रहा है। हाल के दिनों में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले ने अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसी प्रकरण को लेकर विधायक अभय मिश्रा लगातार जांच की मांग कर रहे हैं।विधायक का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके और यदि कहीं किसी स्तर पर गंभीर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारी तय की जा सके।

भोपाल में धरना, पुलिस ने लिया हिरासत में

इसी मांग को लेकर अभय मिश्रा बुधवार को भोपाल स्थित मंत्रालय के बाहर धरने पर बैठ गए थे। पुलिस ने उन्हें वहां से हिरासत में ले लिया। विधायक प्रसूता और नवजात की मौत के मामले में सीबीआई जांच तथा उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं।अब पोस्टमार्टम को लेकर लगाए गए नए आरोपों ने विवाद को और गहरा कर दिया है। एक ओर विधायक अपने दावों के समर्थन में पुराने अनुभव और कथित डॉक्टर के संदेश का हवाला दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष, दस्तावेजी और आधिकारिक जांच ही यह तय कर सकती है कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि अस्पताल में महिलाओं के शवों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आई थीं, तो उनकी जांच कितनी गंभीरता से हुई और उन जांचों का निष्कर्ष क्या रहा? यही सवाल अब रीवा के इस विवाद को महज राजनीतिक बयानबाजी से आगे ले जाकर संस्थागत जवाबदेही के कटघरे में खड़ा कर रहा है।

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