बारिश और फिसलन के बीच आमने-सामने की टक्कर से मची चीख-पुकार, सड़क से उतरकर सात फीट गहरी खाई में जा गिरी बस; गंभीर घायलों का रीवा में उपचार जारी
रीवा। रीवा-सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग-39 पर मंगलवार शाम बदवार स्टैंड के समीप हुए भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रीवा से सीधी की ओर जा रही यात्री बस की सामने से आ रहे बलकर वाहन से जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर के बाद बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे करीब सात फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में पांच यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 21 यात्री घायल बताए गए हैं।हादसा उस वक्त हुआ जब बारिश के कारण सड़क पर फिसलन थी। बताया जा रहा है कि इसी दौरान तेज रफ्तार बलकर अनियंत्रित हुआ और यात्री बस को सामने से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयावह थी कि कुछ ही पलों में मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बस के भीतर फंसे यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ पड़े।
जेसीबी से शुरू हुआ रेस्क्यू, घायलों को पहुंचाया गया अस्पताल
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। जेसीबी की मदद से बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का अभियान चलाया गया। घायलों को तत्काल गुढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति वाले मरीजों को रीवा के संजय गांधी अस्पताल रेफर किया गया।बताया जा रहा है कि तीन घायलों की हालत बेहद गंभीर है और उनका उपचार आईसीयू में किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने मृतकों और घायलों के लिए सहायता राशि घोषित की
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को ₹2-2 लाख तथा गंभीर रूप से घायल यात्रियों को ₹1-1 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि हादसे में घायल प्रत्येक व्यक्ति को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और इलाज में किसी तरह की कमी न रहने दी जाए।
हादसे के बाद बस के दस्तावेजों की भी होगी जांच
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने दुर्घटना के कारणों की जांच के साथ बस के परमिट, फिटनेस, बीमा और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच कराने की बात कही है। प्रशासन यह भी देखेगा कि बस संचालन से जुड़े सभी नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।रीवा-सीधी मार्ग पर हुआ यह हादसा केवल पांच परिवारों को हमेशा के लिए अपनों से दूर कर गया, बल्कि उन 21 परिवारों को भी दहशत में छोड़ गया जिनके अपने अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हादसे की असली वजह क्या थी और क्या समय रहते सड़क सुरक्षा से जुड़े इंतजाम इस त्रासदी को रोक सकते थे।
