नई दिल्ली, 14 अगस्त। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संदेश में देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता की सार्थकता तभी है, जब देश का प्रत्येक नागरिक अपने सपनों को साकार करने के अवसरों का लाभ उठाए और भारत को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने की भावना से कार्य करे।
राष्ट्रपति ने राष्ट्र निर्माण में विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, किसानों, श्रमिकों, खिलाड़ियों, कलाकारों, न्यायपालिका, प्रशासन, सफाईकर्मियों और समाजसेवियों सहित विभिन्न वर्गों के योगदान की सराहना की। उन्होंने सशस्त्र बलों, पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों के जवानों तथा विदेशों में देश का मान बढ़ाने वाले प्रवासी भारतीयों को भी विशेष रूप से नमन किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य अंत्योदय की भावना पर आधारित है, जिसमें विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना प्राथमिकता है। राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों, महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने समावेशी विकास, डिजिटल बुनियादी ढांचे, सड़क, रेल, जलमार्ग और हवाई संपर्क के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने जन धन योजना, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे करोड़ों लोगों को लाभ मिला है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी बताते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ और LiFE जैसे अभियानों में जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, युवाओं की प्रतिभा, स्टार्टअप संस्कृति और खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों को उन्होंने देश की नई शक्ति बताया।
राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेनाओं के पराक्रम और नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत शांति, संवाद, सहयोग और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के साथ विश्व समुदाय में अपनी भूमिका निभा रहा है।
अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि देश का वास्तविक अर्थ केवल उसकी भूमि नहीं, बल्कि उसके लोग हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से देशप्रेम की समावेशी भावना के साथ विकसित भारत के निर्माण की राष्ट्रीय साधना में योगदान देने का आह्वान किया।
जय हिंद! जय भारत!
