नया कंप्यूटर मॉडल बताएगा CME की रफ्तार और असर, अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी में मिलेगी मदद

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बेंगलुरु/नई दिल्ली। सूर्य से निकलने वाले शक्तिशाली कोरोनल मास इजेक्शन (CME) की गति और पृथ्वी पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का पहले से अनुमान लगाने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों की टीम ने एक अत्याधुनिक त्रि-आयामी मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक (MHD) कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित किया है, जो CME के विस्फोट से पहले उसमें संचित चुंबकीय ऊर्जा और उसके निष्कासन की प्रक्रिया को समझने में मदद कर सकता है।

CME सूर्य के बाहरी वातावरण से निकलने वाले चुंबकीय प्लाज्मा के विशाल विस्फोट हैं। ये लाखों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंतरिक्ष में फैल सकते हैं। यदि इनका रुख पृथ्वी की ओर हो, तो उपग्रह प्रणालियों, विद्युत ग्रिड और संचार सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में CME की गति और तीव्रता का समय रहते अनुमान लगाना अंतरिक्ष मौसम की निगरानी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

फ्लक्स रोप पर केंद्रित है अध्ययन

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA) के शोधकर्ताओं ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यह मॉडल तैयार किया है। अध्ययन में CME के प्रमुख प्रेरक माने जाने वाले मैग्नेटिक फ्लक्स रोप (MFR) पर विशेष ध्यान दिया गया है। ये प्लाज्मा में मौजूद चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के मुड़े हुए और गुंथे हुए समूह होते हैं।

मॉडल यह दिखाता है कि जब फ्लक्स रोप सूर्य के वातावरण में ऊपर उठती है, तो वह आसपास के चुंबकीय क्षेत्र को खींचती और संकुचित करती है। इसके बाद विपरीत दिशाओं वाले चुंबकीय क्षेत्र के बीच पुनर्संयोजन शुरू होता है। इस प्रक्रिया के दौरान एक पतली, उच्च विद्युत धारा वाली करंट शीट बनती है, जहां चुंबकीय ऊर्जा मुक्त होने लगती है। धीरे-धीरे यही प्रक्रिया तीव्र होकर फ्लक्स रोप के विस्फोटक निष्कासन में बदल जाती है।

CME की गति और चुंबकीय पुनर्संयोजन में सीधा संबंध

अध्ययन की सबसे अहम उपलब्धि CME की गति और चुंबकीय पुनर्संयोजन की दर के बीच स्पष्ट संबंध सामने आना है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जितनी तेजी से चुंबकीय पुनर्संयोजन होता है, CME का विस्फोट उतनी ही तेजी और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता है।

इससे संकेत मिलता है कि पुनर्संयोजन फ्लक्स केवल CME के विस्फोट होने या न होने में ही भूमिका नहीं निभाता, बल्कि यह उसकी गति और ऊर्जा को भी प्रभावित करता है। यह निष्कर्ष भविष्य में CME की तीव्रता का अनुमान लगाने वाले मॉडल को और बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकता है।

कंप्यूटर सिमुलेशन के साथ वास्तविक आंकड़ों से सत्यापन

शोधकर्ताओं ने मॉडल में लगातार होने वाले दो फ्लक्स रोप विस्फोटों का सिमुलेशन किया। इसके निष्कर्षों की स्वतंत्र रूप से अवलोकन संबंधी आंकड़ों के साथ भी तुलना की गई। फिनलैंड स्थित हेलसिंकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने NASA के Helioseismic and Magnetic Imager (HMI) और Atmospheric Imaging Assembly (AIA) से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इस विश्लेषण में योगदान दिया।

सिमुलेशन से प्राप्त परिणामों और सूर्य के वास्तविक अवलोकनों की तुलना ने चुंबकीय पुनर्संयोजन और CME की गति के बीच संबंध को और मजबूत किया।

अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी में बढ़ेगी क्षमता

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अध्ययन उन जटिल प्रक्रियाओं को समझने में नई जानकारी देता है, जिनके जरिए सूर्य में धीरे-धीरे विकसित होने वाली चुंबकीय संरचना अचानक एक शक्तिशाली विस्फोट में बदल जाती है। भविष्य में इस तरह के मॉडल CME के पृथ्वी तक पहुंचने से पहले उसकी गति, ऊर्जा और संभावित प्रभाव का बेहतर अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं।

इस अध्ययन में डॉ. समृद्धि शंकर मैती, डॉ. पियली चटर्जी, श्री इजास एस. मिथीन और डॉ. रणदीप सरकार की टीम ने योगदान दिया है। अध्ययन Astrophysical Journal में प्रकाशित हुआ है। इसकी कंप्यूटेशनल गणनाएं IIA के डेटा सेंटर में स्थित नोवा HPC सुविधा पर की गईं।

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