छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर सरकार का फोकस, आत्महत्या रोकथाम के लिए बहु-स्तरीय कदम तेज

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लोकसभा में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने दी जानकारी; एनईपी 2020, मनोदर्पण, यूजीसी दिशा-निर्देश और कोचिंग सेंटर नियमों पर दिया जोर


नई दिल्ली | 4 अगस्त 2026
देश में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और बढ़ते मानसिक तनाव को लेकर केंद्र सरकार ने कई स्तरों पर व्यापक पहल की है। शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि छात्रों में आत्महत्या की घटनाओं की रोकथाम के लिए सरकार शिक्षा, परामर्श, जागरूकता और संस्थागत सहायता को मजबूत कर रही है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वार्षिक दुर्घटनावश मृत्यु एवं आत्महत्या (एडीएसआई) रिपोर्ट के अनुसार छात्र आत्महत्या के प्रमुख कारणों में पारिवारिक समस्याएं, प्रेम संबंध, बीमारी और परीक्षा में असफलता शामिल हैं। रिपोर्ट में वर्षवार, राज्यवार, लिंगवार और आयु वर्ग के आधार पर विस्तृत आंकड़े उपलब्ध हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को मजबूत करना भी उसकी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में समग्र शिक्षा, चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, शारीरिक स्वास्थ्य, रचनात्मकता और मनोसामाजिक कल्याण पर विशेष बल दिया गया है।
शिक्षा मंत्रालय की ‘मनोदर्पण’ पहल के तहत छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को प्रशिक्षित विशेषज्ञों के माध्यम से मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन, नियमित वेबिनार, लाइव इंटरैक्टिव सत्र ‘सहयोग’ और ‘परिचर्चा’ आयोजित किए जाते हैं, जिनका प्रसारण पीएम ई-विद्या चैनलों और एनसीईआरटी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी किया जाता है।
उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए यूजीसी ने जनवरी 2023 में राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति लागू करने संबंधी सलाह जारी की थी। इसके अलावा अप्रैल 2023 में जारी दिशा-निर्देशों में शारीरिक फिटनेस, खेल गतिविधियों, तनाव प्रबंधन, करियर संबंधी चिंता, अवसाद और सकारात्मक वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2023 में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण संबंधी विस्तृत रूपरेखा भी जारी की। इसमें प्रत्येक संस्थान में परामर्श सेवाएं, संकट की प्रारंभिक पहचान, आत्महत्या रोकथाम की मानक प्रक्रिया (एसओपी), छात्र सहायता नेटवर्क और प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनवरी 2024 में जारी कोचिंग सेंटर विनियमन दिशा-निर्देशों के तहत परामर्श सुविधा, पारदर्शी शुल्क व्यवस्था, छात्रों के बैच पृथक्करण पर रोक तथा अत्यधिक शैक्षणिक दबाव डालने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने के प्रावधान किए गए हैं।
सरकार ने बताया कि सभी आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और आईआईआईटी परिसरों में समर्पित मानसिक स्वास्थ्य एवं परामर्श केंद्र स्थापित किए गए हैं। यहां पेशेवर मनोवैज्ञानिक, परामर्शदाता और आवश्यकता अनुसार मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं। संस्थानों में तनाव प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और सहायता संबंधी नियमित कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
रोजगार और भविष्य की चिंताओं को कम करने के उद्देश्य से सरकार कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। स्वयं प्लस पोर्टल पर 17 क्षेत्रों में 89 उद्योग साझेदारों के सहयोग से 500 से अधिक कौशल आधारित पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए गए हैं। अब तक छह लाख से अधिक विद्यार्थी इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करा चुके हैं।
इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) के माध्यम से छात्रों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराया जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को एकीकृत कर छात्रों के लिए अधिक सुरक्षित, संतुलित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा रहा है। यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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