नई दिल्ली । (एजेंसी) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की सुरक्षा को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है कि अब युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।
उन्होंने उत्तराखंड के घोराखाल स्थित सैनिक स्कूल के स्थापना दिवस और हीरक जयंती समारोह में संबोधन के दौरान कहा कि आधुनिक युद्ध अब आर्थिक, डिजिटल, ऊर्जा, खाद्य और साइबर क्षेत्रों तक फैल चुका है, ऐसे में हर नागरिक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने चेताया कि आज के दौर में खतरे केवल पारंपरिक सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साइबर हमले, सूचना युद्ध और अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा जैसे नए आयाम तेजी से उभर रहे हैं। ऐसे समय में एक मजबूत सेना के साथ-साथ जागरूक, अनुशासित और तैयार नागरिकों का होना देश की सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है। रक्षा मंत्री ने युवाओं से विशेष आह्वान करते हुए कहा कि वे अनुशासन, मानसिक दृढ़ता और स्पष्ट सोच विकसित करें ताकि किसी भी संकट की स्थिति में राष्ट्र के साथ मजबूती से खड़े रह सकें।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र में किए जा रहे आधुनिकीकरण प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय सेना को अत्याधुनिक हथियारों और तकनीकों से लगातार सशक्त किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने VUCA (अस्थिर, अनिश्चित, जटिल और अस्पष्ट) दुनिया का जिक्र करते हुए छात्रों को दूरदर्शिता, समझ, साहस और अनुकूलनशीलता जैसे गुण अपनाने की सलाह दी।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देशभर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत 100 नए सैनिक स्कूल खोले जा रहे हैं। साथ ही, National Cadet Corps (NCC) में कैडेटों की संख्या बढ़ाकर 20 लाख करने का निर्णय लिया गया है, जिससे युवाओं को रक्षा सेवाओं से जोड़ने का अवसर और व्यापक होगा।
महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने सैनिक स्कूलों में लड़कियों के प्रवेश को ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि यह ‘नारी शक्ति’ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में ये छात्र-छात्राएं देश की रक्षा और विकास दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सैनिक स्कूल घोराखाल की 60 वर्षों की गौरवशाली यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान देश को सैकड़ों सैन्य अधिकारी दे चुका है और भविष्य में भी राष्ट्र सेवा की इस परंपरा को और मजबूत करेगा।

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