जयपुर । (मीडिया) बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री एक बार फिर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर चल रहे एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि बाबा कुछ समय के लिए हिमालय की ओर साधना के लिए जा सकते हैं।
वीडियो में बताया गया है कि बागेश्वर धाम में लगने वाले दिव्य दरबार में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां बाबा लोगों की समस्याएं सुनते हैं और पर्ची निकालकर समाधान बताते हैं। लेकिन अब यह चर्चा तेज हो गई है कि बाबा कुछ समय के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाकर हिमालय क्षेत्र (बदरीनाथ)में साधना करने जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो नियमित लगने वाले दिव्य दरबार कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकते हैं।
वीडियो में यह भी कहा गया है कि बाबा उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में साधना के लिए जाने की योजना बना सकते हैं। हालांकि इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन इस संभावना ने श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता और चर्चा दोनों को बढ़ा दिया है।
वीडियो में यह भी बताया गया कि बाबा के कार्यक्रमों को लेकर कई बार सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा होती रही है। उनके कार्यक्रमों में बड़ी भीड़ और उनके बयानों के कारण कई बार राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं।
इसी संदर्भ में वीडियो में बाबा का हाल ही में अजमेर के पुष्कर में लगा दिव्य दरबार का जिक्र किया गया । बताया गया कि किस प्रकार राजस्थान सरकार और नेता बाबा के सामने नतमस्तक थे । बताया गया कि जब बाबा के कार्यक्रमों या आने की चर्चा होती है तो स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। अजमेर जैसे धार्मिक महत्व वाले शहर में यह दरबार राजनीतिक दृष्टि से भी देखा गया इसलिए यहांकाग दरबार चर्चाओं में है ।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का प्रभाव केवल धार्मिक मंच तक सीमित नहीं रहा है। उनके कार्यक्रमों में उमड़ने वाली भीड़ और हिंदू एकता जैसे मुद्दों पर दिए गए बयानों को कई बार सत्तारूढ़ दल के वैचारिक माहौल से जोड़कर देखा जाता रहा है। ऐसे में अगर बाबा लंबे समय तक साधना के लिए सार्वजनिक मंच से दूर रहते हैं तो इसका असर जनभावनाओं और राजनीतिक पर भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि यह भी सच है कि भारत में धर्म और राजनीति का संबंध नया नहीं है। कई धार्मिक संतों और संस्थानों का सामाजिक प्रभाव लंबे समय से रहा है। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि बाबा के हिमालय जाने से सीधे राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे ।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि बाबा के हिमालय जाने या दिव्य दरबार बंद होने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इस चर्चा ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि जब आस्था का मंच इतना बड़ा जनसमूह जोड़ने लगे तो उसका असर समाज के साथ-साथ राजनीति में भी महसूस किया जाने लगता है।
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