गंगा महोत्सव 2025 : 75 जिलों में हर घाट पर ,भारत की जीवनरेखा का,श्रद्धा से सेवा महोत्सव 4 नवंबर से हुआ शुरू

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अयोध्या (एजेंसी) : 4 नवंबर 2025 से “गंगा उत्सव” का शुभारंभ हुआ। इस वर्ष राज्य मिशन फॉर क्लीन गंगा (SMCG-UP) द्वारा यह आयोजन प्रदेश के 75 जिलों में किया जा रहा है। गंगा उत्सव का उद्देश्य गंगा नदी के संरक्षण, स्वच्छता और जन-जागरूकता को मजबूत करना है। यह उत्सव केवल एक सांस्कृतिक पर्व नहीं बल्कि पर्यावरण और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बन चुका है।

गंगा उत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में तब हुई जब केंद्र सरकार ने गंगा को “राष्ट्रीय नदी” का दर्जा दिया था। उसी के बाद से हर साल नवंबर में गंगा उत्सव आयोजित किया जाता है ताकि लोग मां गंगा के प्रति अपने धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दायित्व को याद रखें। इस आयोजन की शुरुआत राष्ट्रीय मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) और राज्य मिशन (SMCG-UP) ने मिलकर की थी। इसका मूल उद्देश्य है — “जन-भागीदारी से जन-जागरूकता” यानी गंगा की स्वच्छता और उसकी जीवनदायिनी धारा को बचाने के लिए समाज को सक्रिय करना।

पिछले कुछ वर्षों में गंगा उत्सव के माध्यम से राज्य में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। जिलों में “डिस्ट्रिक्ट गंगा कमिटियों” का गठन हुआ है जो स्थानीय स्तर पर गंगा संरक्षण कार्यों को देखती हैं। स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा के कार्यक्रम चलाए गए हैं। “गंगा प्रहरी” नाम से प्रशिक्षित स्वयंसेवक नदी किनारों पर स्वच्छता और जैव-विविधता के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि गंगा के जल की गुणवत्ता में अभी पूर्ण सुधार नहीं हुआ है, परंतु समाज में गंगा संरक्षण को लेकर चेतना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

इस वर्ष का मुख्य आयोजन 5 नवंबर को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या में होगा। यहां गंगा प्रहरी संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, पेंटिंग और निबंध प्रतियोगिताएँ, तथा नदी संरक्षण पर कार्यशालाएँ आयोजित होंगी। इसके अलावा हर जिले में लोक संगीत, नृत्य, कला प्रदर्शन और गंगा तटों की सफाई अभियान भी चलेंगे। इस बार प्रति जिले 20,000 से अधिक बच्चों को इस कार्यक्रम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

 “गंगा उत्सव 2025” सिर्फ एक उत्सव मां गंगा के प्रति आस्था, जिम्मेदारी और स्वच्छ पर्यावरण की ओर बढ़ाया गया एक सामूहिक कदम है। यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि गंगा सिर्फ एक नदी नहीं — वह भारत की जीवनरेखा और सांस्कृतिक आत्मा है।

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