भिंड। सवर्ण समाज पर SC-ST एक्ट के कथित दुरुपयोग को लेकर समाज में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर एडवोकेट अनिल मिश्रा के नेतृत्व में सवर्ण समाज के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने समाज से जुड़े विभिन्न मामलों और शिकायतों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
भिंड में झूठी FIR और बिना जांच कार्रवाई पर सवर्ण समाज ने जताया विरोध — पुलिस पर पक्षपात और दबाव में काम करने के लगे आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
एडवोकेट मिश्रा ने कहा कि “पुलिस पर दबाव बनाकर बिना जांच और तथ्यों के सवर्ण समाज एवं सनातनियों पर SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज किए जा रहे हैं, जो न केवल असंवैधानिक बल्कि सामाजिक रूप से भी अन्यायपूर्ण है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार आपसी विवादों में भी पुलिस दबाव में आकर स्वर्ण समाज के लोगों पर झूठे आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कर देती है, जिससे कई परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।
अनिल शर्मा ने स्पष्ट कहा कि “पुलिस को किसी भी शिकायत पर पहले निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई होनी चाहिए। मगर वर्तमान में बिना जांच के ही जेल भेज दिया जाता है, जो न्याय व्यवस्था के विपरीत है।”
ज्ञापन सौंपने से पहले अनिल मिश्रा जिला न्यायालय और शास्त्र भवन पहुंचे, जहां उन्होंने अधिवक्ताओं से मुलाकात कर मामले पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि तीन सवर्ण समाज के युवकों पर लगाए गए आरोपों का विरोध कर रहा है, जिन पर जाटव समाज के एक व्यक्ति के साथ मारपीट और जबरन पेशाब पिलाने का आरोप लगाया गया । शर्मा ने कहा कि यह मामला पूरी तरह झूठा और राजनीतिक दबाव में दर्ज किया गया है।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
सवर्ण समाज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
सौजन्य से: MP दर्पण News
