
जच्चा और नवजात की मौत के बाद गांधी स्मारक अस्पताल में हंगामा, रक्षाबंधन के दिन भाइयों ने मांगा जवाब; अस्पताल अधीक्षक से तीखी बहस का वीडियो वायरल
रीवा। जिस बहन की कलाई पर रक्षाबंधन के दिन भाइयों को राखी बांधनी थी, उसी बहन की मौत का जवाब मांगने के लिए दोनों भाई अस्पताल के गलियारों में भटकते नजर आए। रीवा के गांधी स्मारक अस्पताल में एक युवा जच्चा और उसके नवजात शिशु की मौत के बाद उठे सवाल अब थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मामला उस वक्त और ज्यादा संवेदनशील हो गया जब अस्पताल परिसर में मृतका के परिजनों और अस्पताल अधीक्षक के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो सामने आया।परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान उनकी 22 वर्षीय बहन की हालत लगातार बिगड़ती रही और उसने अपनी जान बचाने की गुहार भी लगाई। परिवार का दावा है कि समय रहते उचित उपचार और गंभीरता दिखाई जाती तो शायद आज उनकी बहन और उसका नवजात जीवित होते। इन्हीं सवालों को लेकर रक्षाबंधन के दिन मृतका के दोनों भाई अस्पताल पहुंचे और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा।वीडियो में अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा और मृतका के भाई के बीच तीखी नोकझोंक दिखाई देती है। परिजनों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों और सवालों के बीच डॉक्टर की ओर से कथित तौर पर कहे गए कुछ शब्दों को लेकर भी सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। “22 साल की बहन को गर्भवती क्यों करवाया…” जैसी कथित टिप्पणी ने इस पूरे विवाद को और भड़का दिया है। हालांकि वीडियो के पूरे संदर्भ और कथित टिप्पणी की आधिकारिक पुष्टि की जांच आवश्यक है।
“मेरी बहन को बचा लो…”—परिजनों का दर्द बना सबसे बड़ा सवाल
मृतका के परिवार का कहना है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनकी बहन अपनी हालत को लेकर भयभीत थी और लगातार मदद की गुहार लगा रही थी। परिजनों के अनुसार, सामने आए वीडियो में नर्सिंग स्टाफ उसे समझाने का प्रयास करता भी दिखाई देता है। लेकिन कुछ ही समय बाद महिला की मौत हो गई। नवजात शिशु को भी नहीं बचाया जा सका।अब सवाल केवल एक मौत का नहीं, बल्कि एक परिवार के उजड़ने और उस इलाज व्यवस्था पर उठे सवालों का है, जिस पर लोगों को सबसे ज्यादा भरोसा होता है।
दो नर्सिंग कर्मचारियों पर कार्रवाई, लेकिन सवाल अभी बाकी
मामले की गंभीरता को देखते हुए नर्सिंग स्टाफ की साधना वर्मा और सीमा मुजाल्दे को निलंबित किया जा चुका है। लेकिन परिजन इसे पूरी कार्रवाई नहीं मान रहे हैं। उनका सवाल है कि आखिर इलाज के दौरान क्या हुआ, किस स्तर पर लापरवाही हुई और मां व नवजात की जान क्यों नहीं बचाई जा सकी?अस्पताल प्रबंधन की कार्रवाई के बावजूद परिवार का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
रक्षाबंधन पर भाइयों के हाथ खाली रह गए…
यह कहानी सिर्फ अस्पताल की एक घटना नहीं है। यह उस भाई के दर्द की कहानी है, जो रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन से मिलने नहीं, बल्कि उसकी मौत का जवाब मांगने अस्पताल पहुंचा।जिस उम्र में एक 22 वर्षीय युवती अपने बच्चे के जन्म की खुशियां देखती, उस उम्र में उसकी मौत और नवजात की मौत ने परिवार के सामने जिंदगी भर का सवाल खड़ा कर दिया है।अब सबसे बड़ा सवाल—क्या इस मामले में सिर्फ निलंबन तक कार्रवाई सीमित रहेगी या मां और नवजात की मौत की पूरी जिम्मेदारी तय होगी?नोट: उपचार में लापरवाही और वीडियो में कही गई कथित बातों से जुड़े आरोप परिजनों के हैं। मामले की निष्पक्ष जांच और अस्पताल प्रशासन तथा संबंधित जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही जिम्मेदारी और तथ्यों की अंतिम पुष्टि हो सकेगी।
