छतरपुर में साइबर ठगी के ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क पर पुलिस का बड़ा प्रहार, 3 गिरफ्तार; 35 करोड़ की ठगी से जुड़े तार

Spread the love

कियोस्क संचालक समेत तीन आरोपी गिरफ्त में, 20 बैंक पासबुक, 23 एटीएम कार्ड और 104 सिम बरामद; कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच तेज

छतरपुर। साइबर ठगों तक पहुंचने के लिए पुलिस अब सिर्फ मोबाइल नंबर और बैंक खाते खंगालने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कस रही है जो ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल करता है। छतरपुर में कोतवाली पुलिस ने इसी कड़ी में कार्रवाई करते हुए म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी के कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कियोस्क संचालक समेत तीन आरोपियों—सलमान राइन, उज्जवल अग्रवाल और राहुल पांडेय—को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और सिम कार्ड बरामद हुए हैं, जिनकी जांच अब इस नेटवर्क की वास्तविक पहुंच सामने लाने में अहम मानी जा रही है।

20 पासबुक, 23 एटीएम और 104 सिम ने खोले नेटवर्क के राज

पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 बैंक पासबुक, 23 एटीएम कार्ड और 104 सिम कार्ड बरामद किए हैं। इतनी बड़ी संख्या में बैंक खातों और सिम कार्ड की बरामदगी ने जांच एजेंसियों का ध्यान उस व्यवस्था की ओर खींचा है, जिसमें कथित तौर पर अलग-अलग लोगों के बैंक खातों को साइबर अपराध से हासिल रकम के लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया जाता था।जांच में पुलिस को इन बैंक खातों का संबंध विभिन्न राज्यों में दर्ज करीब 35 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से मिलने की बात सामने आई है। इनमें एक बैंक खाता तमिलनाडु में हुई 37.80 लाख रुपये की साइबर ठगी से भी जुड़ा पाया गया है।

खाते किसी और के, खेल साइबर ठगी की रकम का

पुलिस की जांच के मुताबिक गिरोह का कथित तरीका बेहद सुनियोजित था। लोगों के बैंक खाते उपलब्ध कराए जाते थे या उन्हें किराये पर लिया जाता था। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को जमा करने, अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और फिर निकालने के लिए किया जाता था।यानी साइबर ठगी करने वाले लोगों से सीधे पैसा लेने के बजाय कथित तौर पर ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे, जिनके वास्तविक धारक किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर होते थे।पुलिस के अनुसार, रकम के लेन-देन के बाद एटीएम कार्ड और दूसरे दस्तावेजों को नष्ट करने की बात भी जांच में सामने आई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि नेटवर्क से जुड़े लोग बैंकिंग ट्रेल को मिटाने और जांच से बचने की कोशिश करते थे

एक आरोपी पर पहले से दर्ज हैं आठ अपराध

पुलिस ने आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि भी खंगालनी शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक सलमान राइन के खिलाफ पहले से आठ अपराध दर्ज हैं। इसके अलावा वह छतरपुर के सिविल लाइन थाने में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में वांछित बताया गया था।अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, बैंक खाते उपलब्ध कराने से लेकर रकम निकालने तक किसकी क्या भूमिका थी और अलग-अलग राज्यों में सामने आए साइबर अपराधों से इनका नेटवर्क किस स्तर तक जुड़ा हुआ है।

35 करोड़ के आंकड़े ने बढ़ाई जांच की गंभीरता

छतरपुर की इस कार्रवाई में बरामदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण वह बैंकिंग कनेक्शन माना जा रहा है, जो जांच को कई राज्यों तक ले जा रहा है। करीब 35 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से खातों के जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर की कार्रवाई से आगे बढ़कर अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क की जांच का रूप ले चुका है।पुलिस अब बैंक खातों की लेन-देन की पूरी श्रृंखला, सिम कार्ड के इस्तेमाल, एटीएम निकासी और आरोपियों से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका को जोड़कर नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है।छतरपुर पुलिस की यह कार्रवाई एक बार फिर यह संकेत देती है कि साइबर ठगी का खेल सिर्फ मोबाइल और इंटरनेट तक सीमित नहीं है। इसके पीछे बैंक खाते, एटीएम, सिम कार्ड और ऐसे लोगों का पूरा तंत्र काम कर सकता है, जो कथित तौर पर ठगी की रकम को वैध बैंकिंग व्यवस्था के भीतर घुमाने का माध्यम बनते हैं।फिलहाल तीन आरोपी पुलिस गिरफ्त में हैं, जबकि गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *