नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र 2025 के आरंभ से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह सत्र केवल संसदीय औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र की तीव्र प्रगति की यात्रा में नई शक्ति और नई ऊर्जा भरने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं की जीवंतता का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। बिहार चुनावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने रिकॉर्ड मतदाता भागीदारी, विशेषकर महिला मतदाताओं की बढ़ती उपस्थिति को ‘‘लोकतंत्र की ताकत और उम्मीद का नया प्रतीक’’ बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया देख रही है कि भारत का मजबूत लोकतंत्र उसकी आर्थिक प्रगति को गति दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने सभी दलों से अपील की कि सत्र को राष्ट्रीय हित, नीति-आधारित बहस और रचनात्मक चर्चाओं पर केंद्रित रखें। उन्होंने आगाह किया कि न तो चुनावी जीत का अहंकार और न ही चुनावी हार की निराशा संसदीय कार्यवाही में झलकनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसद नीति और परिणामों के लिए है, ‘‘ड्रामा या नारेबाजी के लिए नहीं’’। पीएम ने कहा कि जानकारी आधारित बहस से ही जनता को बेहतर जानकारी मिलती है, इसलिए सांसदों को रचनात्मक आलोचना और सकारात्मक सुझाव देने चाहिए।
पहली बार चुने गए और युवा सांसदों के लिए अवसरों की कमी पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने सभी दलों से आग्रह किया कि नई पीढ़ी को पर्याप्त मंच और समय दिया जाए, क्योंकि ‘‘सदन और राष्ट्र दोनों उनकी ऊर्जा और समझ से लाभान्वित होते हैं’’।
प्रधानमंत्री ने इस सत्र को विशेष बताते हुए कहा कि उच्च सदन में नए सभापति के नेतृत्व में संसदीय कार्य और मजबूत होगा। साथ ही उन्होंने जीएसटी सुधारों को ‘‘विश्वास का मजबूत आधार’’ बताते हुए कहा कि यह सत्र अगली पीढ़ी के सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश तेजी से नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है और यह सत्र इस यात्रा में नई ऊर्जा और शक्ति प्रदान करेगा।
