पुष्कर। राजस्थान की पवित्र तीर्थनगरी में इन दिनों सनातन आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है, जहां बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सनातन परंपरा और पितृ श्रद्धा को लेकर बड़ा बयान दिया, जिसने श्रद्धालुओं के बीच गहरी धार्मिक चेतना जगाई।
अपने संबोधन में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जो लोग विभिन्न स्थानों पर चादर चढ़ाने की परंपरा निभाते हैं, उन्हें एक बार तीर्थराज पुष्कर आकर अपने पितरों का विधि-विधान से पिंडदान अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुष्कर में किया गया पितृ तर्पण और पिंडदान मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है तथा पूर्वजों की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति का “बेड़ापार” हो जाता है। उनके इस वक्तव्य के बाद धर्मसभा स्थल सनातन धर्म के जयघोषों से गूंज उठा।
उन्होंने कहा कि पुष्कर केवल धार्मिक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि पितृमोक्ष की पावन भूमि है, जहां स्थित पवित्र पुष्कर सरोवर और विश्व प्रसिद्ध सनातन परंपरा के प्रमुख आस्था केंद्र हैं। यहां सदियों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान करते आ रहे हैं।
धर्मसभा में धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं से भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और सनातन मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सनातन धर्म मानवता, संस्कार और परिवार व्यवस्था को मजबूत करने वाला जीवन मार्ग है। उन्होंने समाज को अपनी जड़ों से जुड़ने और धर्म आधारित जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।
पुष्कर में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान कथा, भजन, यज्ञ और आशीर्वचन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। राजस्थान सहित देशभर से पहुंचे भक्तों के कारण तीर्थनगरी पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में रंगी नजर आ रही है तथा आयोजन को सनातन जागरण का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
