जयपुर । (मीडिया) राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने वाली (RGHS) में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराए गए विशेष ऑडिट में सामने आया कि योजना के तहत फर्जी बिल, अनावश्यक जांच, संदिग्ध दवा वितरण और नियमों के विरुद्ध क्लेम पास किए गए। प्रारंभिक जांच के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए हाल ही में आठ और स्वास्थ्यकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इससे पहले भी सात डॉक्टरों सहित कई कार्मिकों पर कार्रवाई हो चुकी है।
जांच में यह पाया गया कि कुछ सरकारी चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने निजी अस्पतालों व मेडिकल स्टोर्स के साथ मिलीभगत कर RGHS पोर्टल पर ऐसे उपचार और जांच दर्शाए जो या तो आवश्यक नहीं थे या वास्तविक रूप से हुए ही नहीं। कई मामलों में पात्रता से बाहर व्यक्तियों के नाम पर इलाज दिखाकर सरकारी धन का भुगतान लिया गया। क्लेम प्रक्रिया में तकनीकी खामियों और निगरानी की कमी का लाभ उठाते हुए फर्जी बिल अपलोड किए गए और भुगतान स्वीकृत कराए गए।
कार्रवाई की टाइमलाइन पर नजर डालें तो वर्ष 2025 के मध्य से विभाग को अनियमितताओं की शिकायतें मिलनी शुरू हुई थीं। इसके बाद चरणबद्ध ऑडिट किया गया। अगस्त 2025 में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए एक दर्जन से अधिक कार्मिकों को निलंबित किया गया। फरवरी 2026 में कार्रवाई और तेज हुई—पहले सात डॉक्टरों को निलंबित किया गया और अब आठ अन्य कर्मचारियों को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सरकार ने अब तक कई एफआईआर दर्ज करवाई हैं और संबंधित अस्पतालों व डायग्नोस्टिक केंद्रों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार करोड़ों रुपये की संदिग्ध राशि की जांच की गई है, जिसमें लगभग 39 करोड़ रुपये की रिकवरी प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। कुछ निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स को अस्थायी रूप से योजना से बाहर किया गया है तथा उनके ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) को ब्लॉक किया गया है ताकि आगे कोई क्लेम स्वीकार न हो सके।
चिकित्सा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है
