अजमेर। हिंदू गौरव और वीरता की धरती अजमेर इस दीपावली बनी इतिहास के साथ अन्याय की साक्षी । जहां देशभर में दीपों की ज्योति से अंधकार मिटाया जा रहा था, वहीं अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के स्मारक स्थल पर सन्नाटा पसरा रहा, दीप तक नहीं जलाया गया।
अजमेर वह शहर है, जहां नगर निगम बोर्ड भारतीय जनता पार्टी के अधीन है, जिले के अधिकांश विधायक भाजपा से हैं, सांसद भाजपा से हैं, राज्य और केंद्र — दोनों जगह भाजपा सरकार है। सरकार ने भी खुलकर ,अजमेर विकास प्राधिकरण और नगर निगम द्वारा लाखों रुपए का बजट आवंटित किया ,टेंडर हुए, लेकिन दीपोत्सव के नाम पर अंधेरा ही फैला रहा।
महेंद्र आर्य (सुभाष ब्रिगेड, आज़ाद हिंद फौज) ने इसे “अजमेर का आंतरिक आतंकवाद” बताते हुए कहा कि—
“यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक चेतना पर प्रहार है। जहां पृथ्वीराज चौहान जैसे वीरों की स्मृति पर दीप नहीं जल सके, वहां यह हिंदुत्व का दावा केवल भाषणों तक सीमित है।”
आर्य ने आगे कहा कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता ने इस ऐतिहासिक स्थल को उपेक्षा की अंधेरी खाई में धकेल दिया है। करोड़ी लाल मीणा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी पहले प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए हैं, परंतु सुधार के नाम पर सिर्फ दिखावा होता आया है।
स्थानीय नेताओं की भूमिका पर भी आर्य ने तीखा प्रहार किया —
“नेता वर्षभर जनता से कटे रहते हैं और सिर्फ जयंतियों या पुष्पांजलि के फोटो खिंचवाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैं। जबकि यह स्मारक नहीं, हमारे गौरव की आत्मा है — और उस पर यह मौन अंधकार, एक चेतावनी है।”
सवाल उठता है:
क्या हमारे गौरव स्थलों की रोशनी अब केवल वोट बैंक की राजनीति के समय याद की जाएगी?
क्या पृथ्वीराज चौहान जैसे महान नायकों का सम्मान अब भाषणों और घोषणाओं तक सीमित रह गया है?
अजमेर की यह चुप्पी, दीपावली के अंधकार से भी ज्यादा गहरी है।
जय हिंद, जय भारत, जय सुभाष।
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