नेताजी का रहस्य – राजनेताओं की दोहरी मानसिकता ही रहस्य ?

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आजाद हिंद फ़ौज ब्रिगेडियर राजस्थान महेंद्र आर्य से विशेष मुलाक़ात

ख़बर वन न्यूज़ की विशेष रिपोर्टअजमेर

अजमेर । आजाद हिंद फ़ौज के राजस्थान ब्रिगेडियर महेंद्र आर्य से विशेष मुलाक़ात में उन्होंने देश के युवाओं से राष्ट्रहित में निर्णायक भूमिका निभाने का आह्वान किया। ब्रिगेडियर आर्य ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित इंडिपेंडेंस नेशनल आर्मी (आजाद हिंद फ़ौज) ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मां भारती की अस्मिता की रक्षा के लिए जो संघर्ष किया, उसकी प्रेरणा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

उन्होंने कहा कि आज मां भारती विशेषकर पुनः देश के युवाओं को पुकार रही है—कि वे राजनेताओं द्वारा युवाओं की मानसिकता पर किए गए अतिक्रमण से मुक्त होकर राष्ट्र के लिए अपना योगदान दें। देश में व्याप्त आंतरिक आतंकवाद, जो भ्रष्टाचार और मिलावटखोरी के रूप में काम कर रहा है, राष्ट्र और मानवता—दोनों के लिए घातक है। इससे देश को मुक्त कराने के लिए प्रत्येक युवा को ,आजाद हिंद फ़ौज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना होगा। तभी देश की दिशा और दशा बदल सकती है।

ब्रिगेडियर आर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद की परिभाषा स्पष्ट की जाती रही है—जो भी गतिविधि राष्ट्रीयता और मानवता के लिए घातक हो, वह आतंकवाद है। फिर प्रश्न यह उठता है कि भ्रष्टाचार राष्ट्र के लिए और मिलावटखोरी मानवता के लिए घातक क्यों नहीं मानी जाती? दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद आज तक न तो भ्रष्टाचार को और न ही मिलावटखोरी को आतंकवाद की श्रेणी में शामिल किया गया, जबकि दोनों ही गंभीर रूप से विनाशकारी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर सार्वजनिक मंचों पर बार-बार यह कहा जाता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस आदर्श और प्रेरणा स्रोत हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता में आते ही अंतरराष्ट्रीय समझौतों—विशेषकर 14 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि के ट्रांसफर ऑफ़ पावर एग्रीमेंट—के अंतर्गत नेताजी को द्वितीय विश्व युद्ध का अपराधी स्वीकार कर लिया जाता है। यह देश के साथ एक बड़ा विरोधाभास और धोखा है।

ब्रिगेडियर आर्य ने युवाओं से अपील की कि वे अपने विवेक से विचार करें—क्या हम उन द्वितीय विश्व युद्ध के अपराधियों से प्रेरणा ले रहे हैं, या फिर उन महान नायकों से, जिन्होंने मां भारती की अस्मिता की रक्षा के लिए युद्ध लड़ा? यह प्रश्न आज हर युवा के सामने है। कि राजनेताओं के द्वारा सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया जाता आ रहा है नेताजी सुभाष चंद्र बोस हमारे प्रेरणा स्तोत्र साथ ही आदर्श है । वहीं दूसरी ओर सत्ता में रहकर उन्हें द्वितीय विश्व युद्ध का अपराधी स्वीकार किया जाता आ रहा है । और राष्ट्र के समक्ष दोहरी मानसिकता प्रस्तुत की जा रही है।

देश के युवाओं को राजनीतिक मानसिक अतिक्रमण से मुक्त होकर स्वयं विवेक निर्णायक निर्णय करना होगा । राष्ट्र के योद्धा महानायक व समस्त क्रांतिकारी जिनके द्वारा मां भारती की अस्मिता को आज तक बचाए हुए रखा है । इन्हीं क्रांतिकारियों के वैचारिक शरीर के रूप में राष्ट्र व अंतराष्ट्रीय स्तर पर आज भी करोड़ों व्यक्ति उनके द्वारा लिए गए संकल्प को पूर्ण करने हेतु अपना सर्वस्त्र नेताजी के कार्य को पूर्ण करने में लगाए हुए हैं ।

अंत में उन्होंने कहा कि देश के सभी युवा विवेकपूर्ण निर्णय लेकर राष्ट्र की दिशा और दशा बदलने में अपना योगदान दें।

जय हिंद | जय भारत | जय सुभाष

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