नई दिल्ली/बागेश्वर, उत्तराखंड। जिस स्थान को स्थानीय धार्मिक मान्यता मां भगवती द्वारा निशुंभ दैत्य के वध से जोड़ती है, उसी बदियाकोट गांव स्थित प्राचीन श्री आदि बद्री मां भगवती मंदिर में 16 अक्टूबर 2026 को भीषण आग लग गई। नवरात्र के दौरान हुए इस अग्निकांड में मंदिर के मुख्य ढांचे, मूर्ति, पूजा मंडप और पारंपरिक लकड़ी की नक्काशी को भारी नुकसान पहुंचा। घटना से श्रद्धालुओं में शोक है।
निशुंभ वध की पौराणिक मान्यता से जुड़ा है मंदिर
यह मंदिर उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील के दुर्गम बदियाकोट गांव में स्थित है। कपकोट से लगभग 50 किलोमीटर दूर मल्ला दानपुर क्षेत्र में स्थित यह मंदिर पारंपरिक हिमालयी स्थापत्य और लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता था।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, मां भगवती ने इसी स्थान पर निशुंभ दैत्य का वध किया था। इसी कथा से क्षेत्र के पुराने नाम वधकोट को जोड़कर देखा जाता है।
आग का कारण अभी स्पष्ट नहीं
प्रारंभिक रिपोर्टों में पूजा के दौरान जलाए गए दीपक और बिजली के शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। हालांकि, किसी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मंदिर समिति के सदस्य केदार सिंह के अनुसार, आग से पारंपरिक काष्ठकला को भारी नुकसान हुआ। कपकोट के उपजिलाधिकारी अनिल चनियाल ने जांच के बाद कारण स्पष्ट होने की बात कही।
क्या यह किसी अनिष्ट का संकेत है?
आस्था से जुड़े लोगों ने नवरात्र में मंदिर में आग लगने को देवी की नाराजगी या भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी का संकेत बता रहे हैं । वहीं प्राचीन मंदिरों की अग्नि सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस अग्निकांड के बाद पहाड़ी क्षेत्रों के अन्य प्राचीन मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर मंदिर प्रशासन और सरकार को ध्यान देना होगा ?
