कैलाश उतरा पुष्कर में: नीलकंठ से हरिहर तक शिवमय हुआ आकाश

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कैलाश उतरा पुष्कर में: नीलकंठ से हरिहर तक शिवमय हुआ आकाश

🌙 शिवरात्रि : पुष्कर में शिवमय हुआ वातावरण

अजमेर । पावन तीर्थ नगरी पुष्कर में इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। विशेष रूप से नीलकंठ महादेव मंदिर और हरिहर महादेव मंदिर शिवभक्ति के दिव्य केंद्र बने रहे। रात्रि जागरण में भक्तों ने भजनों, स्तुति और “ॐ नमः शिवाय” के अखंड जाप के साथ ऐसी अलौकिक अनुभूति की, मानो स्वयं कैलाश धरा पर अवतरित हो गया हो।

🔱 रात्रि जागरण : भक्ति और आनंद का संगम

शिवरात्रि की पावन रात्रि में दोनों मंदिरों पर सैकड़ों भक्त एकत्रित हुए। ढोल-मंजीरों और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। पूरी रात भजन-कीर्तन, शिव तांडव स्तोत्र और रुद्राभिषेक की ध्वनि से वातावरण शिवमय बना रहा। भक्तों ने जागरण में भाग लेकर आत्मशुद्धि और आत्मिक शांति का अनुभव किया।

अगले दिन प्रातःकाल भक्तों ने भगवान शिव का विधिवत अभिषेक किया। जल, दूध, गन्ने का रस, भांग, शहद, दही और पंचामृत से महादेव का अभिषेक कर श्रद्धालुओं ने अपने और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना की। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, फल और मिठाइयाँ अर्पित कर भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

🕉️ नीलकंठ महादेव : त्याग और करुणा का प्रतीक

नीलकंठ महादेव का स्वरूप समुद्र मंथन की उस पौराणिक कथा की याद दिलाता है, जब भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए विष का पान किया और नीलकंठ कहलाए। यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। यहां आयोजित तीन दिवसीय उत्सव में स्थानीय भक्तों ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और परिक्रमा करने वाले भक्तों के लिए विश्राम, जलपान और प्रसादी की विशेष व्यवस्था की।

परिक्रमा करने वाले भक्त यहां आकर विश्राम करते, भजनों का आनंद लेते और सेवा भाव से अभिभूत होते रहे। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामूहिक सद्भाव का भी प्रतीक बना।

🔔 हरिहर महादेव : शिव और विष्णु की एकता का संदेश

हरिहर महादेव मंदिर शिव और विष्णु की एकात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। ‘हरि’ अर्थात विष्णु और ‘हर’ अर्थात शिव — दोनों शक्तियों का संगम इस मंदिर की विशेष आध्यात्मिक पहचान है। प्राचीन काल से यह स्थान साधना, तप और सनातन परंपरा की रक्षा का केंद्र रहा है।

शिवरात्रि के दिन यहां भक्तों ने दिनभर जलाभिषेक किया। विभिन्न प्रकार के फल, मिष्ठान और नैवेद्य अर्पित कर अपने जीवन की बाधाओं के निवारण और परिवार की उन्नति की प्रार्थना की। मंदिर प्रांगण में प्रसाद वितरण और सामूहिक भक्ति का वातावरण अद्भुत रहा।

🌺 शिवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश

महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मजागरण का अवसर है। यह हमें सिखाती है कि जीवन के विष—अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह—को त्यागकर शिवत्व को अपनाना ही सच्ची साधना है।

पुष्कर के इन दोनों प्राचीन मंदिरों में आयोजित उत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि जब भक्ति, सेवा और समर्पण एक साथ जुड़ते हैं, तब पूरा वातावरण शिवमय हो उठता है।

हर-हर महादेव के जयघोष के साथ संपन्न यह आयोजन भक्तों के हृदय में लंबे समय तक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता रहेगा।

🔱 हर-हर महादेव! ॐ नमः शिवाय!

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