देश में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। डीजल और इलेक्ट्रिक बसों के बाद अब भारत की सड़कों पर ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली बसें उतर गई हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली में दो हाइड्रोजन फ्यूल-सेल बसों को हरी झंडी दिखाकर इस नई तकनीक की शुरुआत की। यह बसें फिलहाल ट्रायल पर चलाई जाएंगी और सफल परीक्षण के बाद देश के अन्य शहरों में भी इस योजना को लागू किया जाएगा।
🌿 क्या है हाइड्रोजन बस
इन बसों को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने विकसित किया है। इनमें ईंधन के रूप में डीजल या पेट्रोल नहीं, बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन गैस का उपयोग होता है। यह हाइड्रोजन सौर ऊर्जा से तैयार की जाती है, जिससे किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता। बस के इंजन में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे बस चलती है। इस प्रक्रिया में सिर्फ पानी (वाष्प) निकलता है, यानी यह बसें “जीरो पॉल्यूशन” हैं।
⚙️ बस की खासियत
एक बार हाइड्रोजन भरने पर बस लगभग 600 किलोमीटर तक चल सकती है और ईंधन भरने में केवल कुछ मिनट लगते हैं। इसमें लगा फ्यूल-सेल इंजन पूरी तरह भारतीय तकनीक से विकसित है। इसके लिए फरीदाबाद में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र तैयार किया गया है, जहां सौर ऊर्जा से हाइड्रोजन बनाई जाती है।
🌍 पर्यावरण और भविष्य
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि हाइड्रोजन बसें भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा का प्रतीक हैं। डीजल वाहनों से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण बढ़ता है, जबकि हाइड्रोजन बसें केवल जलवाष्प छोड़ती हैं। अगले चरण में 15 और बसें दिल्ली-एनसीआर, नोएडा और यमुना सिटी क्षेत्रों में चलाई जाएंगी। लेह-लद्दाख के बाद नोएडा देश का दूसरा शहर होगा जहां ये बसें दौड़ेंगी।
भारत में हाइड्रोजन बस की यह शुरुआत ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। अब सड़कों पर डीजल का धुआं नहीं, बल्कि “हवा-पानी” से चलने वाली बसें नजर आएंगी।
