देहरादून स्थित रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित 30वें दिव्य कला मेला का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन अवसर पर ने कहा कि दिव्य कला मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेरणा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में दिव्यांगजनों की भूमिका निर्णायक होगी।
राज्यपाल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी नवाचारों को दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि तकनीक अवसरों में भेदभाव नहीं करती। उन्होंने मेले में तैयार उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लागू दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 और विभिन्न योजनाओं से दिव्यांगजन मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि सहायक उपकरण उपलब्ध कराने हेतु आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के माध्यम से चालू बजट में ₹375 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
टिहरी सांसद ने मेले को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बताते हुए कहा कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। वहीं विधायक ने इसे दिव्यांगजनों को सम्मान और अवसर देने वाली सराहनीय पहल बताया।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अनुसार, देशभर में आयोजित 29 दिव्य कला मेलों के माध्यम से अब तक ₹23 करोड़ से अधिक का व्यापार हुआ है तथा हजारों दिव्यांग उद्यमियों को रोजगार और ऋण सहायता प्रदान की गई है।
21 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक चलने वाले नौ दिवसीय मेले में 16 राज्यों के 100 से अधिक दिव्यांग कारीगर भाग ले रहे हैं। लगभग 90 स्टॉलों पर हस्तशिल्प, परिधान, जैविक उत्पाद और सजावटी सामग्री प्रदर्शित की जा रही है। 26 फरवरी को रोजगार मेला तथा 1 मार्च को “दिव्य कला शक्ति” सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा। मेले में प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आमजन के लिए निःशुल्क प्रवेश रखा गया है।
