CM के सामने विधायक अभय मिश्रा का तीखा हमला, बोले- ‘सेमरिया भी मध्यप्रदेश का हिस्सा है’, राहत में भेदभाव का लगाया आरोप

Spread the love
Oplus_131072

बाढ़ प्रभावित सेमरिया की अनदेखी पर मुख्यमंत्री के सामने फूटा कांग्रेस विधायक का आक्रोश, बोले—अधिकारियों को पक्षपात से रोकिए; रीवा की बाढ़ को बताया अनियोजित विकास और अतिक्रमण का नतीजा

रीवा। बाढ़ और अतिवृष्टि से जूझ रहे रीवा जिले में राहत और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सियासत उस वक्त गरमा गई, जब सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने मुख्यमंत्री के सामने ही अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को लेकर तीखा हमला बोल दिया। विधायक ने आरोप लगाया कि सेमरिया क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में प्रशासनिक स्तर पर भेदभाव किया जा रहा है और कई जगह राहत कार्यों में बाधा खड़ी की जा रही है।मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखते हुए अभय मिश्रा ने दो टूक अंदाज में कहा कि “सेमरिया भी मध्यप्रदेश का हिस्सा है, वहां भी लोग रहते हैं, वहां भी बारिश होती है और बाढ़ आती है।” विधायक ने मुख्यमंत्री से अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की कि राहत कार्यों में किसी भी तरह का पक्षपात न हो और बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति तक प्रशासन की मदद पहुंचे।

‘राहत कार्य रोके जा रहे हैं, ट्रांसफॉर्मर तक नहीं लगाने दिए जा रहे’

विधायक अभय मिश्रा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सेमरिया विधानसभा क्षेत्र में राहत और पुनर्स्थापना के कार्यों को प्रभावित किया जा रहा है। उनका आरोप है कि अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है तथा प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाएं बहाल करने में भी अड़चनें पैदा की जा रही हैं। विधायक ने यहां तक आरोप लगाया कि कई स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर तक लगाने नहीं दिए जा रहे, जिससे बारिश और बाढ़ की मार झेल चुकी जनता की परेशानी और बढ़ रही है।विधायक का कहना था कि वे मुख्यमंत्री से बहुत ज्यादा उम्मीद लेकर नहीं आए हैं, लेकिन जनता के सामने यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उनका विधायक अपनी विधानसभा की समस्याओं पर चुप बैठने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री के सामने सीधे अपनी बात रखकर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।

रीवा की बाढ़ को बताया ‘कृत्रिम बाढ़’, विकास मॉडल पर भी उठाए सवाल

अभय मिश्रा ने केवल सेमरिया ही नहीं, बल्कि रीवा शहर में आई बाढ़ को लेकर भी सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने रीवा की स्थिति को “कृत्रिम बाढ़” बताते हुए इसके पीछे अनियोजित विकास, नालों पर अतिक्रमण, जल निकासी व्यवस्था की बदहाली और नदी के संकरे होने जैसे कारण गिनाए।विधायक ने रिवर फ्रंट परियोजना को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि शहर में विकास के नाम पर किए गए निर्माण कार्यों तथा प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था से छेड़छाड़ का खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि कई इलाकों में पानी की निकासी बाधित होने के कारण बारिश का पानी बस्तियों और घरों तक पहुंच गया।

‘सर्वे कराइए, कलेक्टर रिपोर्ट दें, बड़ा राहत पैकेज मिले’

विधायक ने बाढ़ प्रभावित गांवों और क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि नुकसान का वास्तविक आकलन कर कलेक्टर के माध्यम से रिपोर्ट तैयार कराई जानी चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों को पर्याप्त राहत मिल सके। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए बड़े राहत पैकेज की जरूरत पर भी जोर दिया।अभय मिश्रा के बयान ने ऐसे समय में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, जब रीवा जिले में भारी बारिश और बाढ़ के बाद राहत, सर्वे, बिजली व्यवस्था, सड़क और जल निकासी जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री के सामने विधायक का सीधे प्रशासनिक भेदभाव का आरोप लगाना अब सियासी बहस का नया मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।हालांकि, विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रशासन या सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के जवाब के बाद ही हो सकेगी। लेकिन मुख्यमंत्री के सामने जिस बेबाकी से सेमरिया की आवाज उठाई गई, उसने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—बाढ़ की मार झेल रही जनता के लिए राहत भी क्या राजनीतिक सीमा देखकर पहुंचेगी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *