
बारिश में क्षतिग्रस्त कक्षों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा—बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं
रीवा। जिले के गंगेव जनपद पंचायत अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हिनौती की बदहाल इमारत को लेकर सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी लगातार आवाज उठा रहे हैं। विद्यालय के अलग-अलग कक्षों से सामने आ रहे वीडियो अब महज किसी भवन की खराब हालत की तस्वीर नहीं रह गए हैं, बल्कि वे उस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं जिसके भरोसे सैकड़ों बच्चों को सुरक्षित शिक्षा देने का दावा किया जाता है।बारिश के दौरान विद्यालय के क्षतिग्रस्त भवन, टपकती छतों और जर्जर कक्षों की स्थिति सामने आई है। वीडियो में विद्यालय से जुड़े कर्मचारी और शिक्षक अलग-अलग कक्षों की वास्तविक स्थिति बताते दिखाई दे रहे हैं। कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं सहित बालिका कक्षाओं तक में भवन की स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। लगातार सामने आ रहे इन वीडियो ने यह प्रश्न जरूर खड़ा कर दिया है कि यदि बरसात के मौसम में कक्षों की छतें टपक रही हैं और भवन क्षतिग्रस्त है, तो विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
शिवानंद द्विवेदी का सवाल सीधा है—क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
विद्यालय में 700 से अधिक विद्यार्थियों और तीन दर्जन से अधिक शिक्षकों के होने की बात सामने रखी गई है। ऐसे में भवन की जर्जर स्थिति को सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज करना गंभीर लापरवाही साबित हो सकती है। खासकर तब, जब बारिश के मौसम में क्षतिग्रस्त हिस्सों और टपकती छतों की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हों।
एक-एक कक्षा की तस्वीरें बता रही हैं कहानी
विद्यालय की स्थिति को लेकर सामने आए वीडियो में अलग-अलग कक्षों की हालत दिखाई गई है। कहीं छत से पानी टपकने की समस्या है तो कहीं भवन के क्षतिग्रस्त हिस्से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। विद्यालय के भृत्य अमरदीप रावत तथा शिक्षक सरोज कुमार मिश्रा द्वारा कक्षों की स्थिति की जानकारी दिए जाने के बाद मामला और गंभीर दिखाई देता है।यह सवाल भी उठना स्वाभाविक है कि यदि भवन निर्माण या मरम्मत में कहीं तकनीकी अथवा गुणवत्ता संबंधी खामी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई? घटिया निर्माण या भ्रष्टाचार का आरोप जांच का विषय है, लेकिन सामने दिखाई दे रही भवन की स्थिति की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराना प्रशासन की जिम्मेदारी जरूर बनती है।
शिवानंद द्विवेदी ने फिर उठाई आवाज
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी लंबे समय से हिनौती विद्यालय की समस्याओं को सामने लाते रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े इस मामले में केवल कागजी खानापूर्ति पर्याप्त नहीं है। यदि भवन वास्तव में असुरक्षित है तो तत्काल तकनीकी परीक्षण कराया जाना चाहिए और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार सामने आ रहे वीडियो, क्षतिग्रस्त भवन की तस्वीरों और स्थानीय स्तर से उठ रही आवाजों के बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई जमीन पर दिखाई क्यों नहीं दे रही?
अब जिम्मेदारी तय करने का समय
मामला किसी राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार का है। प्रशासन चाहे तो एक उच्चस्तरीय तकनीकी टीम भेजकर पूरे भवन का परीक्षण करा सकता है। निर्माण की गुणवत्ता, स्वीकृत राशि, कार्य एजेंसी, निर्माण अवधि और अब तक हुए मरम्मत कार्यों की भी जांच हो सकती है। यदि कहीं अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी तय की जा सकती है।लेकिन यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है, तब भी प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि जिस भवन में सैकड़ों बच्चे पढ़ रहे हैं, वह आज इस हालत में क्यों पहुंचा।हिनौती स्कूल की दीवारें और टपकती छतें अब प्रशासन से जवाब मांग रही हैं। सवाल यह नहीं कि शिकायत किसने की—सवाल यह है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई कब होगी?शिवानंद द्विवेदी की आवाज को दबाने के बजाय प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण, तकनीकी जांच और आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि किसी विद्यालय में पढ़ने वाला हर बच्चा सिर्फ एक विद्यार्थी नहीं, बल्कि प्रदेश का भविष्य
