
कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर प्रभावित इलाकों में घर-घर पहुंच रही राजस्व टीम, जलभराव वाले क्षेत्रों में युद्धस्तर पर निकासी; पेयजल, पशु उपचार और सफाई व्यवस्था पर भी निगरानी
रीवा। 19 और 20 अगस्त की बारिश के बाद आई बाढ़ ने जिले के कई हिस्सों में जनजीवन को प्रभावित किया, लेकिन अब पानी का स्तर नीचे आते ही प्रशासन ने राहत और पुनर्बहाली का मोर्चा पूरी ताकत के साथ संभाल लिया है। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार पहुंचकर नुकसान का जमीनी आकलन कर रही हैं। प्रशासन का पूरा फोकस इस समय प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने, आवागमन बहाल करने और जलभराव की समस्या खत्म करने पर है।जिले के अधिकांश नदी-नालों में जलस्तर सामान्य हो चुका है। हालांकि त्योंथर क्षेत्र में टमस, बेलन और नैना नदियों का जलस्तर अभी भी बढ़ा हुआ है। उत्तरप्रदेश के मेजा, सिरसी और अदवा बांधों से पानी छोड़े जाने को इसके पीछे प्रमुख वजह बताया गया है। ऐसे में प्रशासन ने नदी किनारे और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बनाए रखी है।
गायत्री नगर में जलभराव के बीच प्रशासन की बड़ी कवायद
रीवा शहर का गायत्री नगर जलभराव से जूझ रहा था। समस्या के समाधान के लिए अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट से अधिक क्षमता वाला मडपंप मंगाया गया। जलभराव वाले स्थान तक रास्ता नहीं होने से भारी मशीनरी को मौके तक पहुंचाना आसान नहीं था। इसके बावजूद एडीएम सपना त्रिपाठी और एसडीएम डॉ. अनुराग तिवारी की मौजूदगी में जेसीबी की मदद से मडपंप को मौके तक पहुंचाया गया।नगर निगम के उपयंत्री कमलेश्वर सिंह की निगरानी में निगम की टीम जल निकासी में जुटी है। इसी दौरान जलभराव में फंसे 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन के अनुसार सभी की हालत सामान्य है।
राहत के साथ नुकसान का आंकलन, गांव-गांव पहुंच रही टीम
बाढ़ के बाद अब प्रशासन के सामने सबसे अहम जिम्मेदारी प्रभावित परिवारों और संपत्तियों को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन करना है। इसी क्रम में राजस्व अमला लगातार मैदानी दौरा कर रहा है।सिरमौर तहसील में तहसीलदार ललन सिंह ने सर्वे कार्य का निरीक्षण किया और ग्राम खरौदी में बाधित आम रास्ते को बहाल कराया। वहीं नायब तहसीलदार विन्ध्या मिश्रा ने ग्राम जोरी में टीम के साथ घर-घर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।जवा तहसील के ग्राम बरहुला गीजातर में तहसीलदार राजेश शुक्ला ने पानी की निकासी की व्यवस्था कराई। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन अब केवल नुकसान दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जहां तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है, वहां मौके पर ही समाधान की कोशिश की जा रही है।
दो दिन की तलाश के बाद नदी से मिला युवक का शव
त्योंथर तहसील के ग्राम डीह में पुल के पास नदी में डूबे युवक आरएन यादव की तलाश बाढ़ के तेज बहाव के कारण बेहद मुश्किल बनी हुई थी। नदी में जलस्तर अधिक होने के कारण पहले प्रयास सफल नहीं हो सके। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने लगातार दो दिन तक सर्च ऑपरेशन चलाया।एसडीएम त्योंथर राकेश चौरसिया तथा जिला सेनानी होमगार्ड मीनाक्षी सिंह चौहान की निगरानी में एसडीआरएफ ने नदी में व्यापक सर्चिंग की। लंबे प्रयास के बाद युवक का शव बरामद कर लिया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
अब साफ पानी और संक्रमण से बचाव पर जोर
बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े जोखिमों को भी गंभीरता से लिया है। त्योंथर, रायपुर कर्चुलियान, सिरमौर और जवा तहसीलों में पीएचई विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर खराब हैंडपंपों को दुरुस्त कर रही हैं। साथ ही जलस्रोतों में सोडियम हाइपोक्लोराइट का घोल डालकर क्लोरीनेशन कराया जा रहा है।त्योंथर में पशुपालन विभाग ने शिविर लगाकर बाढ़ प्रभावित पशुओं का टीकाकरण और उपचार शुरू किया है। दूसरी ओर प्रभावित गांवों और बस्तियों में साफ-सफाई का अभियान भी लगातार जारी है।
पानी उतर गया, लेकिन प्रशासन ने राहत की रफ्तार नहीं घटाई
बाढ़ की तत्काल चुनौती भले ही काफी हद तक कम हुई हो, लेकिन प्रशासन अब उसके बाद पैदा हुई समस्याओं से निपटने में जुटा है।सर्वे, जल निकासी, रास्तों की बहाली, रेस्क्यू, पेयजल शुद्धिकरण, पशु चिकित्सा और स्वच्छता—इन सभी मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशों के बाद राजस्व और अन्य विभागों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय हैं। अब प्रशासन की अगली बड़ी चुनौती सर्वे के जरिए सामने आने वाले नुकसान को दर्ज कर प्रभावित परिवारों तक राहत का लाभ पहुंचाना होगी।
