कमजोर पासवर्ड और लापरवाही से खतरे में पड़ सकती है निजी जानकारी। जानिए मोबाइल, बैंक खाते, ईमेल और सोशल मीडिया को साइबर हमलों से कैसे सुरक्षित रखें।
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने कई काम आसान कर दिए हैं, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल साइबर सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन रहा है। AI से चलने वाले कुछ स्वचालित प्रोग्राम कंप्यूटर सिस्टम में मौजूद सुरक्षा की कमियां तेजी से खोज सकते हैं। यदि किसी सिस्टम में कमजोर पासवर्ड, खुली डिजिटल चाबी या गलत सुरक्षा सेटिंग है, तो उसका फायदा उठाकर गोपनीय जानकारी तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In से संबंधित चेतावनी में इस तरह के खतरों पर ध्यान दिलाया गया है। आम लोगों के लिए इसका सीधा मतलब है कि इंटरनेट इस्तेमाल करते समय छोटी-सी लापरवाही भी निजी जानकारी को जोखिम में डाल सकती है।
कैसे हो सकती है आपकी जानकारी चोरी?
मान लीजिए, किसी व्यक्ति का ईमेल पासवर्ड बहुत आसान है या वह कई वेबसाइटों पर एक ही पासवर्ड इस्तेमाल करता है। यदि किसी एक वेबसाइट का डेटा चोरी हो जाता है, तो अपराधी उसी पासवर्ड से उसके दूसरे खातों में घुसने की कोशिश कर सकते हैं।
इसी तरह, फर्जी बैंक संदेश, नकली वेबसाइट, संदिग्ध लिंक और फोन पर मांगी गई गोपनीय जानकारी के जरिए भी लोगों को ठगा जा सकता है। AI का इस्तेमाल करके अपराधी नकली आवाज, वीडियो और संदेश तैयार कर सकते हैं, जो असली जैसे दिखाई देते हैं।
इसलिए अब केवल अनजान व्यक्ति के संदेश से सावधान रहना पर्याप्त नहीं है। परिचित व्यक्ति की आवाज में आए पैसे मांगने वाले फोन की भी दूसरे माध्यम से पुष्टि करना जरूरी है।
मोबाइल, बैंक और ईमेल को सुरक्षित रखने के 8 उपाय
1. मजबूत पासवर्ड रखें: अपने नाम, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर को पासवर्ड न बनाएं। हर महत्वपूर्ण खाते के लिए अलग पासवर्ड रखें।
2. दो-स्तरीय सुरक्षा चालू करें: ईमेल, सोशल मीडिया और जहां सुविधा उपलब्ध हो, बैंकिंग खातों में अतिरिक्त सुरक्षा यानी टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें।
3. OTP किसी को न बताएं: बैंक कर्मचारी, पुलिस अधिकारी या सरकारी अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी OTP, PIN या पासवर्ड मांगे तो साझा न करें।
4. अनजान लिंक न खोलें: बिजली बिल, बैंक खाता बंद होने, इनाम मिलने या सरकारी योजना के नाम पर आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। वेबसाइट का पता स्वयं टाइप करके खोलें।
5. मोबाइल अपडेट रखें: फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउजर और ऐप्स के सुरक्षा अपडेट समय पर इंस्टॉल करें। ऐप केवल आधिकारिक स्टोर से डाउनलोड करें।
6. अनजान ऐप को अनुमति न दें: किसी ऐप को जरूरत से ज्यादा अनुमति न दें। विशेष रूप से स्क्रीन देखने, संदेश पढ़ने, माइक्रोफोन चलाने या फोन को दूर से नियंत्रित करने की अनुमति देने से पहले सावधानी बरतें।
7. AI से बनी आवाज पर तुरंत भरोसा न करें: कोई रिश्तेदार या अधिकारी फोन पर तुरंत पैसे भेजने को कहे तो उसके पुराने या सत्यापित नंबर पर वापस फोन करके पुष्टि करें।
8. बैंक खाते पर नजर रखें: लेन-देन के संदेश चालू रखें और किसी अनजान भुगतान या संदिग्ध गतिविधि की सूचना बैंक को तुरंत दें।
अगर साइबर ठगी हो जाए तो क्या करें?
भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें और आधिकारिक पोर्टल https://www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, रकम रोकने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है; हालांकि इसकी गारंटी नहीं है।
बैंक का पासवर्ड या खाता प्रभावित होने का संदेह हो तो सुरक्षित डिवाइस से पासवर्ड बदलें, सभी सक्रिय सत्र बंद करें और बैंक से संपर्क करें। संदिग्ध ऐप इंस्टॉल किया है तो उसकी पहुंच हटाएं और जरूरत पड़ने पर तकनीकी सहायता लें।
खबर वन न्यूज की अपील
AI अपने आप में अपराधी नहीं है, लेकिन इसका दुरुपयोग साइबर अपराधियों को तेजी से काम करने में मदद दे सकता है। इसलिए सतर्क रहना, मजबूत पासवर्ड रखना और गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करना आज की डिजिटल जिंदगी की बुनियादी जरूरत है।
याद रखें: OTP, PIN और पासवर्ड आपकी निजी चाबी हैं—इन्हें किसी के साथ साझा न करें।
