धीमी शुरुआत, लेकिन दमदार अंत : उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के अभूतपूर्व अपलोड

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उम्मीद अधिनियम, 1995 के 8 अप्रैल 2025 से प्रभावी होने के बाद देशभर के वक्फ बोर्डों को वक्फ संपत्तियों का प्रमाणित डेटा केंद्रीकृत उम्मीद पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया था। 6 जून 2025 को पोर्टल के शुभारंभ के साथ ही अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने राज्यों और वक्फ बोर्डों के लिए व्यापक प्रशिक्षण अभियान शुरू किया। सात संभागीय समीक्षा-सह-प्रशिक्षण बैठकें, हेल्पलाइन सहायता, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सत्र और मास्टर ट्रेनर कार्यक्रमों के माध्यम से बोर्डों को इस प्रक्रिया के लिए तैयार किया गया। 30 राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों और 32 वक्फ बोर्डों को करीब 10 करोड़ रुपये की क्षमता निर्माण निधि भी जारी की गई।

इसके बावजूद, वक्फ बोर्ड शुरुआती चार महीनों तक लगभग निष्क्रिय रहे। जून में जहां केवल 11 अपलोड हुए, वहीं जुलाई में 50, अगस्त में 822 और सितम्बर में महज 4,000 से थोड़ा अधिक रिकॉर्ड दर्ज किए गए। समय सीमा नजदीक आने तक ज्यादातर बोर्ड प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लेते दिखे। स्थिति नवंबर में बदली, जब अचानक सक्रियता बढ़ी और पोर्टल पर 2.42 लाख से अधिक संपत्तियां अपलोड की गईं।

6 दिसंबर 2025 को अपलोड विंडो बंद होने तक कुल 5,17,082 संपत्तियों का रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज किया गया, जिनमें से लगभग आधे सिर्फ अंतिम छह दिनों में आए। अंतिम 150 घंटों में ही 2.50 लाख से अधिक अपलोड होना इस पोर्टल की कार्यक्षमता और तकनीकी मजबूती को दर्शाता है।

कई राज्यों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया—कर्नाटक (58,328), महाराष्ट्र (62,939), गुजरात (27,458), तेलंगाना (46,480), बिहार (15,204), पंजाब (25,910), हरियाणा (13,445), जम्मू-कश्मीर (25,293) और उत्तर प्रदेश (92,830) प्रमुख रहे। दबाव के चरम पर भी पोर्टल स्थिर रहा और 24×7 तकनीकी सहायता टीमों ने सुनिश्चित किया कि अपलोड प्रक्रिया निर्बाध रहे।

इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि केवल 27% वक्फ संपत्तियों का विवरण ही अपलोड हुआ है। मंत्रालय ने इन दावों को भ्रामक बताया है, क्योंकि यह प्रतिशत पुराने भारतीय वक्फ परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली (WAMSI) के त्रुटिपूर्ण और अब निष्क्रिय डेटाबेस पर आधारित है। इस पुराने सिस्टम में हजारों गलत, डुप्लिकेट और अप्रमाणित रिकॉर्ड शामिल थे, जिसके कारण इसे 8 मई 2025 को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया।

इसके विपरीत उम्मीद पोर्टल निर्माण–सत्यापन–अनुमोदन प्रक्रिया पर आधारित है, जिसमें हर चरण पर दस्तावेजी साक्ष्य अनिवार्य हैं। मंत्रालय का कहना है कि उम्मीद पोर्टल का मानकीकृत, प्रमाणित और अद्यतन डेटा ही किसी भी मूल्यांकन का आधार होना चाहिए।

जो मुतवल्ली 6 दिसंबर की समय सीमा से पहले अपलोड नहीं कर सके, वे अब उम्मीद अधिनियम के तहत निवारण के लिए संबंधित वक्फ न्यायाधिकरणों से संपर्क कर सकते हैं।

अंततः, धीमी शुरुआत के बावजूद अंतिम सप्ताहों की तेज रफ्तार ने यह स्पष्ट किया है कि उम्मीद पोर्टल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में एक नई पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था की शुरुआत कर चुका है।

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