कल्पना मिश्रा की मौत से शुरू हुआ विवाद अब SGMH की मर्चुरी, पोस्टमॉर्टम, कथित राजनीतिक दबाव और व्यक्तिगत आरोपों तक पहुंचा; कांग्रेस विधायक के दावों पर भाजपा का पलटवार, अस्पताल प्रबंधन ने भी मांगे प्रमाण
रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद अब रीवा की सियासत में एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां अस्पताल की व्यवस्था से लेकर राजनीतिक दबाव और नेताओं के परिवार तक की बातें सार्वजनिक मंच पर आ रही हैं। कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के लगातार सामने आ रहे बयानों ने सत्ता पक्ष को घेरा है, तो भाजपा नेताओं के पलटवार ने विवाद को और धार दे दी है। सबसे ताजा मामला अभय मिश्रा के उस दावे का है, जिसमें उन्होंने रविवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘राजेंद्र शुक्ल के डर से उनका बेटा ट्रेन से उतर गया।’ विधायक के मुताबिक उनका बेटा भोपाल से रीवा आ रहा था। इसी दौरान कथित रूप से राजेंद्र शुक्ल ने उसे देख लिया। अभय मिश्रा का दावा है कि उनका बेटा डर गया और उसे आशंका हुई कि कहीं उसे किसी झूठे मुकदमे में न फंसा दिया जाए।यह दावा सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा तेज हो गई है।
‘मेरे बच्चे भी डर के मारे घर नहीं आते’—बयान ने पहले ही मचा रखा था बवाल
ट्रेन वाले कथित घटनाक्रम से पहले भी अभय मिश्रा ने राजेंद्र शुक्ल को लेकर ऐसा बयान दिया था, जिसने रीवा की राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी। उन्होंने कहा था कि ‘मेरे बच्चे भी डर के मारे घर नहीं आते।’विधायक ने अपने इन बयानों के जरिए राजेंद्र शुक्ल पर राजनीतिक दबाव और भय का माहौल होने का आरोप लगाया है।हालांकि, इन दावों को लेकर अभी तक स्वतंत्र रूप से ऐसी कोई पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे यह साबित हो सके कि वास्तव में ट्रेन में राजेंद्र शुक्ल ने विधायक के बेटे को देखा था या इसी वजह से वह ट्रेन से उतरा था। इसलिए यह पूरा घटनाक्रम फिलहाल विधायक के दावे के रूप में ही सामने है।
मामला यहीं नहीं रुका, SGMH की मर्चुरी तक पहुंची सियासी लड़ाई
कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत को लेकर सरकार पर हमलावर अभय मिश्रा ने SGMH की मर्चुरी और पोस्टमॉर्टम व्यवस्था को लेकर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए।उनके बयान में महिला शवों के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोप शामिल थे। इस बयान ने अस्पताल प्रबंधन और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी।SGMH के अधीक्षक डॉ. प्रियंक शर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मर्चुरी और संबंधित परिसर सीसीटीवी निगरानी में है। अस्पताल प्रबंधन ने गंभीर आरोप लगाने वाले व्यक्ति से ठोस प्रमाण सामने रखने की मांग की है।यानी अब इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है—आरोप के समर्थन में प्रमाण क्या हैं?फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
जनार्दन मिश्रा ने संभाला मोर्चा
अभय मिश्रा के बयान पर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने भी तीखा पलटवार किया। उन्होंने विधायक के बयान को शर्मनाक और संवेदनहीन बताते हुए कहा कि मृतकों से जुड़े मामलों में सार्वजनिक बयान देते समय भाषा, तथ्य और परिजनों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए।भाजपा की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि गंभीर आरोपों को केवल राजनीतिक मंच से उठाने के बजाय उनके समर्थन में प्रमाण भी सामने रखे जाने चाहिए।इस तरह एक तरफ कांग्रेस विधायक के आरोप हैं तो दूसरी तरफ भाजपा का पलटवार और अस्पताल प्रबंधन का खंडन।
कल्पना मिश्रा प्रकरण बना पूरे विवाद की असली वजह
इस सियासी घमासान की शुरुआत उस घटना से हुई जिसने रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। SGMH में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के बाद परिजनों ने उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए।मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई हुई। अस्पताल से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। इसके बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग को घेरना शुरू कर दिया।अभय मिश्रा ने राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग को लगातार उठाया। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों और विधायक की बयानबाजी को निशाने पर लिया।
अब रीवा की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल—कौन बताएगा पूरा सच?
एक तरफ कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत का मूल सवाल है। दूसरी तरफ SGMH की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे गंभीर प्रश्न हैं। और अब इसके बीच व्यक्तिगत स्तर पर राजनीतिक दबाव के दावे भी सामने आने लगे हैं।ट्रेन से बेटे के उतरने का दावा हो या मर्चुरी को लेकर लगाए गए गंभीर आरोप—इन सभी मामलों में अंतिम निष्कर्ष स्वतंत्र जांच और प्रमाण के आधार पर ही निकाला जा सकता है।लेकिन इतना तय है कि रीवा की राजनीति में अब यह विवाद महज ‘अस्पताल बनाम सरकार’ नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे कांग्रेस बनाम भाजपा, आरोप बनाम खंडन और बयान बनाम प्रमाण की बड़ी राजनीतिक लड़ाई में बदल चुका है।
जनता की नजर अब बयान पर नहीं, सबूत पर
रीवा में इस समय हर नया बयान पुराने विवाद को और हवा दे रहा है। कांग्रेस सवाल पूछ रही है, भाजपा पलटवार कर रही है और अस्पताल प्रबंधन आरोपों को प्रमाणित करने की मांग कर रहा है।लेकिन इस पूरे शोर के बीच सबसे जरूरी सवाल वही है— कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत की वास्तविक वजह क्या थी? जिम्मेदारी किसकी तय होगी? और मर्चुरी को लेकर लगाए गए बेहद गंभीर आरोपों में आखिर कितनी सच्चाई है? इन सवालों का जवाब राजनीतिक मंच नहीं, जांच की निष्पक्ष कसौटी देगी। रीवा में सियासत गर्म है, बयान लगातार आ रहे हैं—अब जनता इंतजार कर रही है उस सच का, जिसे न आरोपों की जरूरत होगी और न पलटवार की।
