नई दिल्ली/जयपुर, 28 अगस्त। सावन पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को देशभर में रक्षाबंधन का पर्व पारंपरिक श्रद्धा, उल्लास और भाई-बहन के स्नेह के साथ मनाया गया। सुबह से ही घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गईं। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, तिलक लगाया और उनकी सुख-समृद्धि व दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने भी बहनों की सुरक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ निभाने का संकल्प लेते हुए उपहार दिए।
इस बार 28 अगस्त को ही क्यों मनाया गया रक्षाबंधन?
इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा की तिथि 27 अगस्त से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रही। धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार भद्रा से जुड़े समय को देखते हुए रक्षाबंधन का मुख्य पर्व 28 अगस्त को मनाया गया। दिल्ली के लिए राखी बांधने का प्रमुख मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया।
राष्ट्रपति भवन से प्रधानमंत्री आवास तक दिखा राखी का उल्लास
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाया और पर्व को भाई-बहन के रिश्ते से आगे प्रेम, सद्भाव और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर स्कूली बच्चियों के साथ रक्षाबंधन मनाया। बच्चियों ने प्रधानमंत्री को राखियां बांधीं और उन्होंने बच्चों से बातचीत भी की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी एनसीसी कैडेट्स के साथ रक्षाबंधन मनाया। देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक संगठनों, पुलिसकर्मियों, सुरक्षा बलों और विद्यार्थियों ने भी राखी के कार्यक्रम आयोजित किए।
राखी का संदेश बदला, भावना वही
रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर धागा बांधने का पर्व नहीं है। बदलते समय के साथ इसका संदेश भी व्यापक हुआ है—भाई-बहन एक-दूसरे की सुरक्षा, सम्मान, विश्वास और जरूरत के समय साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं। यही कारण है कि आज रक्षाबंधन पारिवारिक रिश्तों के साथ सामाजिक सौहार्द और आपसी जिम्मेदारी का भी संदेश देता दिखाई दिया।
इस रक्षाबंधन का सबसे बड़ा संदेश यही रहा—रिश्तों की मजबूती केवल राखी के धागे से नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने से होती है ।
