नई दिल्ली/ तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका की ओर से ईरान पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने की तैयारी के बीच ईरान ने इसे अमेरिकी दबाव की नीति करार देते हुए कहा है कि ऐसे कदम पहले भी विफल रहे हैं और आगे भी कामयाब नहीं होंगे। यह जानकारी Reuters की 23 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में सामने आई है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी प्रतिबंधों की संभावित घोषणा को लेकर कहा कि सैन्य कार्रवाई और आर्थिक दबाव के बाद अब उसी तरह की पुरानी रणनीति दोहराई जा रही है। उनके मुताबिक, यह अमेरिकी नीति की मजबूती नहीं बल्कि हताशा को दर्शाती है। उन्होंने अमेरिका से सम्मानजनक तरीके से बातचीत कर समाधान तलाशने की बात भी कही।
अमेरिका करेगा नए प्रतिबंधों का ऐलान
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट सोमवार को ईरान के खिलाफ नई कार्रवाई का विवरण देने वाले हैं। अमेरिका पहले ही संकेत दे चुका है कि प्रस्तावित प्रतिबंध बेहद कड़े होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों को भी आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है जो ईरान को किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद या राहत पहुंचाते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बढ़ा दबाव
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का सीधा असर रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। Reuters के मुताबिक, यहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप जैसी स्थिति में पहुंच गई है, जिससे तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ा है।
ईरान ने पहले कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को तब तक पूरी तरह नहीं खोलेगा, जब तक अमेरिका से जुड़े कुछ प्रमुख मुद्दों पर समझौता नहीं होता। इनमें प्रतिबंध हटाना, ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना और सैन्य दबाव समाप्त करना शामिल हैं।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख का तेहरान दौरा
इसी बीच ईरान ने बताया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर सोमवार को तेहरान का दौरा करेंगे। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और संघर्ष को कम करने के प्रयासों पर चर्चा हो सकती है। पाकिस्तान इस संकट के दौरान मध्यस्थता की कोशिशों में भी शामिल रहा है।
चीन पर भी अमेरिकी दबाव
अमेरिका की नई रणनीति का असर ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी पड़ सकता है। Reuters के अनुसार, चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है और अमेरिका ने चीन से ईरान को समर्थन देने से बचने का आग्रह किया है। चीन लगातार बातचीत और कूटनीतिक समाधान की वकालत कर रहा है।
फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ते की तलाश जारी है, लेकिन नए प्रतिबंधों की संभावित घोषणा से दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है।
स्रोत: Reuters | रिपोर्ट पर आधारित स्वतंत्र हिंदी प्रस्तुति – Khabar One News
