अमेरिका ने दिया बड़ा संकेत—समझौते के ज्यादातर मुद्दों पर सहमति, अंतिम टेक्स्ट पर चल रहा काम; भारत की अर्थव्यवस्था, निर्यात और रणनीतिक रिश्तों पर पड़ेगा असर
नई दिल्ली, 23 अगस्त। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने रविवार को संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील सैद्धांतिक रूप से लगभग अंतिम रूप ले चुकी है। अब मुख्य काम कानूनी और तकनीकी भाषा को अंतिम रूप देना है।
गोर के मुताबिक समझौते के लगभग सभी प्रमुख तत्वों पर सिद्धांततः सहमति बन चुकी है। दोनों पक्ष अब दस्तावेज की अंतिम भाषा और तकनीकी बिंदुओं को तय करने में जुटे हैं। इससे संकेत मिलता है कि लंबे समय से चल रही बातचीत जल्द ही औपचारिक समझौते में बदल सकती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?
अमेरिका भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं में कमी आने से भारतीय निर्यातकों, उद्योगों और अमेरिकी बाजार में कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। व्यापार समझौता निवेश और कारोबारी भरोसा बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रूस से तेल खरीद के बीच अमेरिका के साथ संतुलन
भारत के लिए यह बातचीत ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसी बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में तेज बढ़ोतरी की है। जून और जुलाई 2026 में रूसी तेल का भारतीय आयात प्रतिदिन 26 लाख बैरल से अधिक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।
इस परिस्थिति में भारत एक ओर अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से तेल खरीद बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ व्यापार और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह भारत की बहु-आयामी विदेश और आर्थिक नीति को भी दर्शाता है।
100 फीसदी टैरिफ के मुद्दे पर भी नजर
रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका में भारत पर संभावित अतिरिक्त टैरिफ की चर्चा भी होती रही है। अमेरिकी राजदूत ने इस संदर्भ में अमेरिकी कांग्रेस और प्रशासन के रुख के बीच अंतर की ओर भी संकेत किया है। ऐसे में ट्रेड डील का अंतिम स्वरूप भारत के लिए विशेष महत्व रखता है।
अब आगे क्या?
अब निगाहें दोनों देशों की ओर से समझौते के अंतिम टेक्स्ट और औपचारिक घोषणा पर हैं। यदि अंतिम सहमति बनती है तो यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को भी नई गति मिलने की संभावना है।
एक तरफ रूस से रिकॉर्ड तेल खरीद, दूसरी तरफ अमेरिका से ट्रेड डील—भारत ने दोनों मोर्चों पर अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई है।
