नईदिल्ली।(Live lwo) सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में झूठे POCSO मामलों के बढ़ते चलन पर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने एक पति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज POCSO व दुष्कर्म सहित 10 से अधिक आपराधिक मामलों को रद्द करते हुए कहा कि आरोप अस्पष्ट, मनगढ़ंत और साक्ष्यहीन थे।
अदालत ने कहा कि कई मामलों में नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल प्रतिशोध, आर्थिक लाभ या दबाव बनाने के लिए किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि POCSO कानून का दुरुपयोग केवल वैवाहिक विवादों तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक, व्यावसायिक और वित्तीय विवादों में भी देखा जा रहा है।
पीठ ने चेतावनी दी कि झूठे मुकदमे निर्दोष लोगों को परेशान करने के साथ न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ डालते हैं। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि वास्तविक यौन शोषण और उत्पीड़न के मामलों में कानून का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
