युवा और आरटीआई: जवाबदेही की संस्कृति का निर्माण विषय पर वेबिनार आयोजित// 323 वें आरटीआई वेबिनार में पूर्व सूचना आयुक्त राहुल सिंह द्वारा भी पार्टिसिपेंट्स के प्रश्नों का किया गया समाधान// युवा वर्ग में सूचना के अधिकार के प्रचार प्रसार को लेकर आयोजित हुआ विशेष वेबिनार// उत्तराखंड के आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन द्वारा साझा की विशेष जानकारी// सामाजिक आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया कार्यक्रम का संचालन// देश के विभिन्न राज्यों से आरटीआई एक्टिविस्टों ने लिया हिस्सा और रखें अपने विचार //

Spread the love

दिनांक 30 अगस्त 2026 रीवा मप्र।

रीवा मप्र: भारत के जाने-माने आरटीआई रिवॉल्यूशनरी ग्रुप के बैनर तले लगातार 323 वें रविवार को आयोजित होने वाला राष्ट्रीय स्तर का बेबीनार आयोजित किया गया जिसमें देश प्रदेश के जाने-माने सूचना आयुक्त आरटीआई एक्टिविस्ट, आरटीआई रिसोर्स पर्सन और सामाजिक कार्यकर्ता एवं सिविल राइट्स एक्टिविस्ट ने भाग लिया। इस बीच जीबीपीआईईटी (GBPIET) कॉलेज, पौड़ी गढ़वाल के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफेसर वीरेंद्रकुमार ठक्कर द्वारा “युवा और आरटीआई: जवाबदेही की संस्कृति का निर्माण” विषय पर एक विशेष वेबिनार में अपना विशेष पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के प्रति जागरूक करना और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाना था। इस बीच पूर्व सूचना आयुक्त मध्य प्रदेश श्री राहुल सिंह द्वारा भी उपस्थित पार्टिसिपेंट्स और आरटीआई एक्टिविस्टों के सवालों के जवाब दिए गए और युवा और आरटीआई विषय पर अपने विचार रखे गए। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से सैकड़ो प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और अपने प्रश्न पूछे तथा विचार भी रखे।

पारदर्शिता और युवाओं के लिए आरटीआई का महत्व

उत्तराखंड से आरटीआई रिसोर्स पर्सन और कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर वीरेंद्रकुमार ठक्कर ने बताया कि आरटीआई पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम है। भारत की 65% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, ऐसे में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। यह कानून छात्रों और युवा पेशेवरों को शिक्षा, नौकरियों, छात्रवृत्ति, परीक्षा मूल्यांकन और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ी सटीक जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है।

कानूनी रूपरेखा और आवेदन की प्रक्रिया

वेबिनार में आरटीआई अधिनियम के संवैधानिक आधार (अनुच्छेद 19), आवेदन प्रक्रिया, स्पष्ट और सटीक भाषा का प्रयोग, निर्धारित शुल्क, समय-सीमा और छूट के प्रावधानों पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने सार्वजनिक प्राधिकारियों द्वारा स्वप्रेरित प्रकटीकरण और सूचना आयोग में प्रथम व द्वितीय अपील की प्रक्रियाओं को भी समझाया।

शिक्षा और रोजगार क्षेत्र में आरटीआई का प्रभाव

जाने माने आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्रकुमार ठक्कर ने स्पष्ट किया कि आरटीआई छात्रों को केवल मूकदर्शक न बनाकर एक सक्रिय नागरिक बनाती है। इसका उपयोग शैक्षणिक संस्थानों में संकाय पदों की रिक्तियों, बुनियादी ढांचे पर खर्च, प्लेसमेंट रिकॉर्ड, छात्रवृत्ति और परीक्षा पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ी को ठीक करने के लिए किया जा सकता है। डिजिटल टूल्स और सोशल मीडिया के माध्यम से आरटीआई से प्राप्त निष्कर्षों को साझा कर सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है।

चुनौतियां और कानूनी बारीकियां

323 वें विशेष वेबीनार सत्र के दौरान युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा हुई, जिनमें कम जागरूकता, प्रशासनिक देरी और प्रतिकूल परिणामों का डर शामिल है। इसके अतिरिक्त, वेबिनार में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट किया गया:राजनीतिक प्रतिनिधि और दल: सांसद और विधायक व्यक्तिगत रूप से आरटीआई के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकारी’ नहीं हैं। उनके आधिकारिक वेतन, भत्ते और विधायी रिकॉर्ड संबंधित विधानसभा या संसद सचिवालय से प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन उनका व्यक्तिगत पत्राचार और राजनीतिक दल इसके दायरे से बाहर हैं।कॉर्पोरेट और विधिक संस्थाएं: आरटीआई के तहत कृत्रिम विधिक व्यक्ति (कंपनी/संस्था) आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें आवेदक के बजाय मुख्य रूप से एक पते के रूप में माना जाता है।सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ: सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के हवाले से सेवा निरंतरता, ब्रेक-इन-सर्विस, नियमित भर्ती प्रक्रिया और बैकडोर नियुक्तियों के अंतर पर चर्चा की गई।पाठ्यक्रम में आरटीआई को शामिल करने की पहलकॉलेज के पाठ्यक्रमों में आरटीआई के बुनियादी सिद्धांतों को शामिल करने, प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए विधिक साक्षरता कार्यशालाएं आयोजित करने और आरटीआई क्लब स्थापित करने का सुझाव दिया गया।वेबिनार में नरेश कुमार सैनी, राज तिवारी, प्रेम झांसी, सुरेश मौर्य, अधिवक्ता रोहित त्रिपाठी, आरटीआई एक्टिविस्ट उत्तम चंद्र वशिष्ठ, एक्टिविस्ट देवेंद्र अग्रवाल एवं सुनील खंडेलवाल सहित अन्य प्रतिभागियों ने आरटीआई प्रक्रियाओं में होने वाली देरी, बीमा दावों और वर्चुअल सुनवाई से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का समापन अगले रविवार को पुनः एक नए विषय पर चर्चा के संकल्प के साथ हुआ।कार्यक्रम का संचालन आरटीआई एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा किया गया इसमें प्रचार प्रसार में आरटीआई रिवॉल्यूशनरी ग्रुप के प्रचार प्रसार प्रकोष्ठ के प्रभारी पवन दुबे का विशेष योगदान रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *