
6 हजार से अधिक घरों पर जलभराव का असर, 16 राहत शिविरों में 169 लोगों को दिया गया आश्रय—मोटरबोट से प्रभावित बस्तियों तक पहुंचे जनप्रतिनिधि और अधिकारी
त्योंथर/रीवा। टमस नदी के बढ़ते जलस्तर ने त्योंथर क्षेत्र में बाढ़ का संकट गहरा दिया है। नदी का पानी बढ़ने से निचले इलाकों की बस्तियां जलमग्न हो गई हैं और बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार प्रभावित हुए हैं। प्रशासन के अनुसार क्षेत्र के करीब 309 गांवों में जलभराव की स्थिति बनी है, जबकि 6 हजार से अधिक घर इससे प्रभावित हुए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए त्योंथर विधायक सिद्धार्थ तिवारी राज, कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरूकरण सिंह ने प्रभावित इलाकों में पहुंचकर जमीनी स्थिति का जायजा लिया।अधिकारियों और विधायक की टीम ने सबसे पहले महेबा शंकरपुर पहुंचकर बाढ़ और जलभराव से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। क्षतिग्रस्त मकानों की स्थिति देखी गई और ग्रामीणों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली गई। इस दौरान विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पानी उतरने के बाद प्रभावित गांवों में सर्वे कराया जाएगा और जलभराव से हुए नुकसान के आधार पर पात्र लोगों को शासन के प्रावधानों के अनुसार राहत उपलब्ध कराई जाएगी।इसके बाद टीम ने त्योंथर नगर पंचायत की पचामा बस्ती का रुख किया, जहां टमस नदी के बढ़े जलस्तर ने बसोरन बस्ती में हालात बिगाड़ दिए हैं। बस्ती के कई हिस्सों में करीब दो से चार फीट तक पानी भरने की स्थिति सामने आई। विधायक, कलेक्टर और एसपी ने मोटरबोट के जरिए जलभराव वाले हिस्सों का निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी परेशानियां जानीं।
राहत शिविरों में पहुंचाए गए प्रभावित परिवार
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए त्योंथर तहसील में 16 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 169 प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। राहत शिविरों में प्रशासन की ओर से भोजन, पेयजल, बिजली और दवाओं की व्यवस्था की गई है। विधायक और अधिकारियों ने विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय में बनाए गए राहत केंद्र का भी निरीक्षण किया। यहां रह रहे प्रभावित लोगों से व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली गई। लोगों ने बताया कि उन्हें भोजन, पानी, बिजली और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कलेक्टर का सख्त निर्देश—पानी उतरते ही नुकसान का सर्वे शुरू करें
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जलभराव खत्म होते ही नुकसान का सर्वे तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वे केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि संवेदनशीलता के साथ प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया जाए। क्षतिग्रस्त मकानों, फसलों और अन्य परिसंपत्तियों को हुए नुकसान का भौतिक निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।कलेक्टर ने यह भी कहा कि शासन के निर्धारित मापदंडों के अनुसार पात्र प्रभावित परिवारों को राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी। जलभराव के कारण कई परिवारों का अनाज और खाद्य सामग्री खराब होने की जानकारी सामने आने पर उन्होंने जिला आपूर्ति अधिकारी को प्रभावित परिवारों के लिए खाद्यान्न की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी प्रशासन की नजर
कलेक्टर ने नगर पंचायत और जनपद पंचायत के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलभराव समाप्त होने के बाद प्रभावित बस्तियों में तत्काल साफ-सफाई अभियान चलाया जाए। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीम भेजकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच और आवश्यक उपचार की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि पानी उतरने के बाद बीमारी फैलने की आशंका को समय रहते रोका जा सके।विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने राहत एवं बचाव कार्य में जुटे अमले को निर्देशित करते हुए कहा कि बाढ़ की इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रभावित लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाए।निरीक्षण के दौरान एसडीएम त्योंथर राकेश चौरसिया, एसडीओपी मनस्वी शर्मा, तहसीलदार राजेश तिवारी, जनपद पंचायत सीईओ प्रवीण वंशोर सहित प्रशासन, पुलिस और स्थानीय निकाय के अधिकारी मौजूद रहे।
