अजमेर। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब भारतीय जनता पार्टी एक और चुनाव सुधार लाने की तैयारी में है। आगामी वर्ष होने वाले पंचायत एवं नगर निकाय चुनावों में शैक्षिक योग्यता को पुनः लागू करने के प्रस्ताव ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। यूडीएच मंत्री ने शहरी निकाय चुनावों तथा पंचायतीराज मंत्री ने पंचायत चुनावों में शैक्षिक योग्यता लागू करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास मंजूरी के लिए भेजा है।
प्रस्ताव के अनुसार सरपंच पद के लिए न्यूनतम 10वीं पास तथा पार्षद पद के लिए 10वीं या 12वीं पास होने की अनिवार्यता तय करने की तैयारी है। इस प्रस्ताव पर शहर के वरिष्ठ समाजसेवी एवं अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रहे हरिराम कोडवानी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बताया। कोडवानी ने इसे भाजपा का राजनीतिक पैंतरा बताते हुए अव्यावहारिक और गैरजरूरी करार दिया।
खबर वन न्यूज को बताया कि पूर्व में वसुंधरा राजे सरकार ने पंचायत व निकाय चुनावों में शैक्षिक योग्यता लागू की थी, जिससे भाजपा को ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक लाभ मिला। बाद में कांग्रेस सरकार ने इसे चुनावी मुद्दा बनाकर सत्ता में आने के बाद समाप्त कर दिया था, क्योंकि जब विधायक और सांसद के लिए कोई शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं है, तो स्थानीय निकायों पर यह शर्त क्यों?
कोडवानी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का शिक्षित होना अच्छी बात है, लेकिन इससे पहले लोकतंत्र में व्याप्त ‘सरपंच पति’, ‘पार्षद पति’ जैसी व्यवस्थाओं पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई जगह वास्तविक जनप्रतिनिधि की बजाय पति या परिवार के सदस्य सत्ता चलाते हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि शैक्षिक योग्यता लागू करनी ही है तो इसे आयु सीमा से जोड़ा जाए। 60 वर्ष से कम उम्र के प्रत्याशियों पर यह शर्त लागू हो, जबकि उससे अधिक उम्र के लोगों को छूट दी जाए, क्योंकि उनके समय में शिक्षा के अवसर सीमित थे और उनके पास अनुभव की पूंजी है।
कोडवानी ने यह विचार ‘खबर वन न्यूज” के माध्यम से सरकार और जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से साझा की ।
यदि आपके मन में कोई सत्ता से सवाल या अपने शहर गली की समस्या है या आप अच्छा लिखना जानते हैं तो आप भी हमें अपने विचार साझा करें । Whatsup :7014668448 , Email: khbaronenews@gmail.com
